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महिला शक्ति: देश की पहली महिला जज थीं ‘जस्टिस अन्ना चाण्डी’

नई दिल्ली। हाल में जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में शपथ ली है। जस्टिस एम. फातिमा बीबी को आप सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज के रूप में जानते ही हैं जिन पर पिछले सप्ताह रक्षक न्यूज ने विशेष जानकारी प्रकाशित की थी।  लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत की पहली महिला जज आखिर कौन थीं ? दरअसल, जस्टिस अन्ना चाण्डी भारत की पहली महिला जज थीं। आज उन्हीं पर केन्द्रित है इस स्तंभ की जानकारी :-





राज्य में कानून की डिग्री लेने वाली पहली महिला

4 मई, 1905 में केरल  के त्रिवेंद्रम के सीरियाई क्रिश्चियन परिवार में अन्ना चाण्डी का जन्म हुआ। वर्ष 1926 में उन्होंने कानून (लॉ) में पोस्ट-ग्रैजुएशन डिग्री हासिल की। खास बात यह भी है कि अन्ना चाण्डी अपने राज्य में कानून की डिग्री  पाने वाली पहली महिला भी थीं। इसके बाद उन्होंने बैरिस्टर के तौर पर कोर्ट प्रैक्टिस शुरू कर दी।

जस्टिस अन्ना चाण्डी : महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया।

वर्ष 1937 में त्रावणकोर के दीवान सर सीपी रामास्वामी अय्यर ने चाण्डी को मुंसिफ के तौर पर नियुक्त किया। इससे वह भारत की पहली महिला जज बन गईं। वर्ष 1948 में चाण्डी को पदोन्नति मिली  और वह जिला जज के तौर पर नियुक्त कीं गईं। अन्ना चाण्डी भारत के किसी हाई कोर्ट की पहली महिला जज भी बनीं।  9 फरवरी, 1959 में उन्हें केरल हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया। यह पद भी पहली बार किसी महिला को मिला।

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