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INS कलवरी 14 दिसंबर को नौसेना में होगी शामिल, हिंद महासागर में भारत का चीन को करारा जवाब होगा

आईएनएस कलवरी

मुंबई। आईएनएस कलवरी के लिए भारतीय नौसेना का लंबा इंतजार गुरुवार (14 दिसंबर) को खत्म हो जाएगा। वेस्टर्न नेवी कमांड में एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में इस पनडुब्बी को नौसेना में कमीशन किया जाएगा। आईएनएस कलवरी के शामिल होने से हिंद महासागर में भारतीय नौसेना की क्षमताओं में कई गुना इजाफा होगा।





आईएनएस कलवरी हिंद महासागर में न सिर्फ नौसेना की ताकत को एक अलग तरीके से परिभाषित करेगी बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के लिए भी एक मील का पत्थर मानी जा रही है। जानकारों के मुताबिक, कलवरी अपनी तरह की पहली स्वदेशी पनडुब्बी है, जिसे मेक इन इंडिया के तहत बनाया गया है। कलवरी को देश में रक्षा उत्पादन की दिशा में एक कीर्तिमान माना जा रहा है।

समंदर में होने वाली आतंकी गतिविधियों का पता लगाकर उसे तबाह करने की क्षमता

आईएनएस कलवरी

पनडुब्बी आईएनएस कलवरी को समुद्र में उतारने को तैयार (फाइल फोटो)

कलवरी स्कॉर्पियन श्रेणी की इस पनडुब्बी की विशेषता यह है कि यह एक विध्वंसक है, जो समंदर में होने वाली आतंकी हलचल का पता लगाकर उसे तबाह करने की क्षमता रखती है। सबसे अहम बात यह है कि पनडुब्बी परमाणु हथियार से भी लैस रहेगी।

भारत ने समंदर में अपनी शक्ति बनने की योजना बनाई है, कलवरी इसी दिशा में एक कदम है

कलवरी-पनडुब्बी

जानकारों के मुताबिक, चीन पनडुब्बियों के मामले में फिलहाल भारत से आगे है। आईएनएस कलवरी के शामिल होते ही भारत हिंद महासागर में चीन को करारा जवाब दे सकेगा। गौरतलब है कि पिछले दो साल से भारत और चीन के रिश्ते में बदलाव आया है। इसलिए भारत ने समंदर में अपनी शक्ति बढ़ाने की योजना बनाई है, कलवरी इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

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