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सेना की ‘नाक’ बनेगा स्वदेशी रॉकेट पिनाक मार्क- 1, एक किमी लंबे क्षेत्रफल को एक झटके में तबाह करने की क्षमता

स्वदेशी पिनाक रॉकेट

लखनऊ। कानपुर के साथ-साथ देश को भी बड़ी कामयाबी मिली है। लंबे परीक्षण के बाद देश के पहले स्वदेशी रॉकेट पिनाक मार्क- 1 सेना की हर परीक्षा में सफल हुआ है। पिछले हफ्ते पोखरण में हुए अंतिम परीक्षण में शानदार प्रदर्शन के बाद सेना ने इसे अपने बेड़े में शामिल करने की मंजूरी दे दी। कानपुर आर्डिनेंस फैक्ट्री (ओएफसी) और डीआरडीओ में इस कामयाबी पर जश्न का माहौल है। ओएफसी को इस वित्त वर्ष मार्च तक 800 रॉकेट सेना के बेड़े में पहुंचाने हैं। अगले वर्ष करीब 2,500 पिनाक रॉकेट देने का ऑर्डर मिला है, आने वाले दिनों में इस ऑर्डर को डबल किए जाने की संभावना है।





वैज्ञानिकों के लिए चुनौती था पिनाक का परीक्षण

वैज्ञानिकों के लिए इसका परीक्षण इसलिए चुनौती बना हुआ था क्योंकि दो वर्ष पहले परीक्षण असफल हो गया था। काफी बदलाव के बाद नई पिनाक का इटारसी में स्टेटिक फायरिंग टेस्ट हुआ, जिसमें सफलता हासिल हुई। पोखरण में 28 और 29 नवंबर को डायनमिक प्रूफ फायरिंग टेस्ट किया गया, जिसमें पिनाक का अद्वितीय प्रदर्शन देखने को मिला। रिसर्च टीम और सेना के ऑफिसर्स उस वक्त खुशी से उछल पड़े जब उन्होंने देखा कि एक्यूरेसी टेस्ट मे 1.5 मीटर के बजाय पिनाक की एक्यूरेसी 0.6 मीटर थी। देश के पहले स्वदेशी रॉकेट की सारी मुश्किलें इसी के साथ खत्म हो गईं।

पिनाक जैसी टेक्नोलॉजी अमेरिका, रूस, इजराइल और चीन के पास ही

 

आर्डिनेंस फैक्ट्री कानपुर के संयुक्त महाप्रबंधक के अनुसार नवंबर के आखिरी हफ्ते में पोखरण में पिनाक मार्क- 1 का परीक्षण सेना ने किया, जो पूरी तरह कामयाब रहा। सेना ने इसके बाद ओएफसी को वित्त वर्ष 2017 मार्च तक 800 रॉकेट की सप्लाई का ऑर्डर दिया है। इसके साथ ही अगले साल तक 5,000 रॉकेट सप्लाई करने हैं। ओएफसी ने भी इसके अनुरूप अपनी क्षमता में विस्तार कर लिया है। अभी तक पिनाक की टक्कर के रॉकेट बनाने की टेक्नोलॉजी अमेरिका, चीन, इजराइल और रूस जैसे दिग्गजों के पास ही थी। अब भारत भी इस सूची में शामिल हो गया है।

जानें पिनाक-मार्क- 1 की खूबियां:

  • 275 किलो वजन और 5 मीटर है लंबाई
  • 38 किमी तक है मारक क्षमता
  • 980 मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार और फायरिंग टाइम 44 सेकेंड
  • 100 किलो RDX एक बार ले जाने में सक्षम
  • 01 किमी लंबा और 800 मीटर चौड़ा क्षेत्रफल एक झटके में तबाह होगा
  • माइनस 40 डिग्री सेल्सियस से लेकर 50 डिग्री सेल्सियस तक फायर करने में महारत

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