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इंडियन नेवी का जुझारू कमांडर अभिलाष टॉमी, जानें 8 खास बातें

भारतीय नौसेना के जांबाज, जुझारू और खतरों से खेलने वाला कमांडर जिसने अपने करियर में कई बार समंदर का सीना चीरकर मंजिल पाई। जब कमांडर अभिलाष टॉमी ‘गोल्डन ग्लोब रेस’ में अकेले अपनी नाव से 48,000 किमी की दूरी तयकर वापस लौटते समय 21 सितंबर को 83 दिन बाद हिंद महासागर के तूफान में फंस जाते हैं। तो जांबाज, बहादुर कमांडर को बचाने के लिए तीन-तीन देशों की नौसेनाएं लग जाती हैं। भारतीय नौसेना के ‘पी8आई विमान’ ने जैसे ही समंदर में अभिलाष की लोकेशन का पता लगाया फिर उसके बाद इंडियन नेवी के साथ ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस के बचाव दल भी अपना अभियान शुरू कर देते हैं। तीन दिन तक समंदर में फंसे रहने के बाद भारतीय नौसेना का कीर्ति चक्र विजेता अभिलाष को काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाल लिया गया है। देश-दुनिया की निगाहें उन्हीं पर थीं। आइये जानते हैं उनके बारे में 08 खास बातें-





लगाया दुनिया का चक्कर बिना किसी आधुनिक तकनीक के..

कमांडर अभिलाष टॉमी

फ्रांस से एक जुलाई को ‘द गोल्डन ग्लोब रेस’ की शुरुआत हुई थी। इस रेस में अकेले अपनी नाव से बिना किसी आधुनिक तकनीक की मदद लिए एक छोटी नाव में बैठकर दुनिया का चक्कर लगाना होता है। कमांडर अभिलाष ने भी वही किया लेकिन फ्रांस लौटते वक्त उनकी नाव क्षतिग्रस्त हो गई और वह बुरी तरह घायल हो गए।

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