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नौसेना को मिला दुश्मन के समुद्र तट पर टैंक उतारने वाला पोत

लैंडिंग क्राफ्ट यूटीलिटी (एलसीयू)

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना को बुधवार को  देश में ही बनाया गया एक ऐसा युद्धक पोत सौंपा गया जिसकी मदद से थलसेना के लड़ाकू जवानों को तोपों और टैंकों के साथ दुश्मन के समुद्र तट पर उतारा जा सकता है जहां से भारतीय थलसैनिक दुश्मन के भीतर के इलाके में जा कर वार कर सकते हैं।





 कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा बनाया गया इस वर्ग का यह तीसरा पोत है जिसे लैंडिंग क्राफ्ट यूटीलिटी (एलसीयू) कहते हैं। इस पोत को प्रोजेक्ट-4 के तहत बनाया गया है। इस पोत की मदद से भारतीय सेनाओं की दुश्मन के तटीय इलाकों में घुसकर वार करने की क्षमता बढ़ेगी।

 एलसीयू एक एम्फीबियस यानी समुद्र और समुद्र तट पर समान रूप से  चलने वाला पोत है जिसे समुद्र तट के अंदर भेजकर वहां सैनिकों और टैंकों को उतारा जा सकता है। 830 टन विस्थापन क्षमता वाले इस पोत पर 60 टन वजन वाले अर्जुन मेन बैटल टैंक जैसे  बड़े  हथियार लादे जा सकते हैं। इस पोत पर एक एकीकृत ब्रिज सिस्टम लगा होता है। इसके अलावा इस पोत पर इंटीग्रेटेड प्लैटफार्म मैनेजमेंट सिस्टम लगा  होता है। इस पोत पर देश में बना सीआरएन-91 गन लगा होता है। इस पोत पर कुछ हमलावर प्रणालियां भी लगी होती हैं जिससे यह आत्मरक्षा कर सकती हैं।

 इस वर्ग का यह तीसरा पोत पोर्ट ब्लेयर स्थित अंडमान एंड निकोबार कमांड को सौंपा गया। कमांड के कमांडर इन चीफ वाइस एडमिरल विमल वर्मा ने नौसेना के लिये  स्वीकार किया। इस पोत पर 45 नौसैनिक सवार हो सकते हैं और यह पोत 160 सैनिकों को दुश्मन के समुद्र तट पर उतार कर हमले के लिये भेज सकता है। यह पोत मानवीय सहायता  मिशनों में भी सहयोग दे सकता है । कई भूमिका निभाने वाला यह पोत दुश्मन के समुद्र तट पर अपना प्रभुत्व भी स्थापित कर सकता है। प्रोजेक्ट-4 के तहत इस तरह के पांच औऱ पोत बनाए जाएंगे। इस पोत से भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमता में इजाफा होगा। यह पोत मेक इन इंडिया की एक मिसाल के तौर पर देखा जा सकता है।

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