Forces

स्पेशल रिपोर्ट: नौसैनिक अभ्यास मालाबार के लिये भारतीय पोत पहुंचे पश्चिमी प्रशांत सागर

अमेरिका का गुआम नौसैनिक अड्डा

नई दिल्ली। पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित अमेरिका के गुआम नौसैनिक अड्डे के पास भारत, अमेरिका औऱ जापान के बीच आयोजित हो रहे त्रिपक्षीय नौसैनिक अभ्यास मालाबार-2018 के लिये भारतीय नौसेना के पोत वियतनाम के नौसैनिक बंदरगाह पर पड़ाव डालने के बाद पश्चिमी प्रशांत महासागर में प्रवेश कर गए है।





यह अभ्यास छह से 15 जून तक चलेगा। अभ्यास का पहला चरण छह से आठ जून तक हार्बर फेज का होगा औऱ 9 से 15 जून तक समुद्री चरण का होगा।

इस अभ्यास में भारतीय नौसेना की ओर से देश में बना स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट सह्याद्री के अलावा कोमोर्ता वर्ग के दो पनडुब्बी नाशक कार्वेट, एक टैंकर जहाज शक्ति और समुद्र टोही विमान पी-8-आई उतारे जाएंगे। अमेरिका की ओऱ से इस साझा अभ्यास में विमानवाहक पोत रोनाल्ड रेगन की अगुवाई में एक करियर स्ट्राइक ग्रुप शामिल होगा। जापानी नौसेना भी मालाबार-2018 में भाग लेने के लिये अपने एक हेलीकाप्टर कैरियर को उतार रही है। इसके अलावा जापान की ओऱ से सोरयो वर्ग की पनड़ुब्बी और लम्बी दूरी के विमान पी-1 को शामिल किया गया है। यह पनड़ुब्बी नाशक विमान पिछले महीने गोवा के समुद्र तट पर भारतीय नौसैनिक अड्डे पर आया था।

मालाबार नौसैनिक अभ्यास की सामरिक हलकों में विशेष अहमियत मानी जाती है। चीन मानता है कि मालाबार अभ्यास के तहत तीन देश उसके खिलाफ सैन्य लामबंदी कर रहे हैं। इस अभ्यास में आस्ट्रेलिया ने भी शामिल होने की इच्छा जताई थी लेकिन भारत इसके लिये तैयार नहीं हुआ। मलाबार अभ्यास सबसे पहले 1992 में भारत और अमेरिका की नौसेनाओं के बीच शुरू हुआ था। तीन साल पहले इसे त्रिपक्षीय बना कर पहली बार जापान को भी इसमें शामिल किया गया।

इस अभ्यास के जरिये भारतीय नौसेना अंतरराष्ट्रीय सामरिक हलकों खासकर चीन को यह संदेश देगी कि वह दक्षिण चीन सागर के पार जा कर प्रशांत महासागर में सैन्य गतिविधियों को सम्पन्न करने में सक्षम है। वह केवल हिंद महासागर के इलाके तक ही अपने को सीमित नहीं रखना चाहती है।

 

Comments

Most Popular

To Top