DEFENCE

भारतीय सेना को मिल सकता S- 400 डिफेंस मिसाइल सिस्टम, न्यूक्लियर हमले को करेगा हवा में नष्ट

एस- 400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम

नई दिल्ली। भारत अपनी सीमाओं के साथ अपने आकाश को सुरक्षित रखने में कोई कोर-कसर छोड़ना नहीं चाहता। इसी के मद्देनजर सेना में आधुनिकीकरण पर लगातार जोर देने के बीच रूस से 39 हजार करोड़ डॉलर की S- 400 Triumf Air Defence system डील पर जल्द मुहर लग सकती है। मीडिया खबरों के मुताबिक इस डील के अनुसार भारतीय सेना को एस- 400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम मिलेगा, जो दुश्मनों को हवा में ही ढेर करने की क्षमता रखता है। खास बात यह है कि ट्रंफ सिस्टम पाकिस्तान के न्यूक्लियर हमले का करारा जवाब दे सकता है।





मिसाइलों में लगने वाला डिफेंस सिस्टम दुश्मनों के जासूस विमानों, मिसाइलों और ड्रोन्स की पहचान 400 किमी की रेंज तक कर सकता है और उन्हें हवा में ही नष्ट कर सकता है। साथ ही यह एक साथ 26 टारगेट को भेदने में सक्षम है। सीमा पर पाकिस्तान की तरफ से लगातार फायरिंग और चीन की आए दिन दबाव बनाने के जवाब देने की वजह से इस डील को काफी अहम माना जा रहा है।

बता दें कि इससे पहले भारत ने रूस से सुखोई- 30 एमकेआई लड़ाकू विमानों की डील करीब 12 बिलियन डॉलर में की थी। इसके अलावा आईएनएस विक्रमादित्य एयरक्राफ्ट करियर की डील करीब 23 बिलियन में हुई थी। वही दो बिलियन डॉलर की डील मिग- 29 की हुई थी जो इस विमानवाहक युद्धपोत से उड़ान भर सकेंगे।

गेम चेंजर है ये मिसाइल

S- 400 ट्रंफ न सिर्फ खतरनाक मिसाइल सिस्टम है बल्कि तकनीक के हिसाब से देखा जाए तो इसके मुकाबले में कई देश कहीं नहीं टिकते हैं, इसका निशाना अचूक है। इस मिसाइल सिस्टम को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के बीच साल 2016 में चर्चा हुई थी। यह चर्चा गोवा में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान हुई थी। दिसंबर 2015 में इसको डीएसी ने क्लियर कर दिया था। जिसके बाद दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच बातचीत हुई थी।

दुश्मन की मिसाइल को बीच में ही नष्ट करने में सक्षम

वर्ष 2016 के दौरान हुई इस बातचीत मे 05 ट्रंफ के अलावा 04 ग्रीगोरिच क्लास और 200 कामोव- 226T लाइट हेलिकॉप्टर के साथ एक न्यूक्लियर सबमरीन को करीब साढ़े दस बिलियन डॉलर की लागत से लीज पर लेने पर सहमति हुई थी। एस- 400 ट्रंफ जंग के वक्त और दुश्मन की मिसाइल को बीच में ही नष्ट करने में सक्षम है। यह मिसाइल सिस्टम लॉन्ग रेंज रडार सिस्टम से भी लैस है जो 100- 300 किलोमीटर तक की रेंज में दुश्मन की मिसाइल को पहचान कर इसको नष्ट कर सकता है। यह एक सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक मिसाइल है जिसका खास काम दुश्मन की मिसाइल को इंटरसेप्ट कर उसको नष्ट करना है। भारत और रूस के बीच इस मिसाइल को लेकर ऐसे समय में बातचीत आरंभ होने वाली है जब इस मिसाइल सिस्टम की बैटरी की सप्लाई चीन की तरफ की जा रही है। यह डील नाटो और चीन के बीच साल 2014 में हुआ था, जो लगभग 3 बिलियन डॉलर का था।

 

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