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भारतीय नौसेना को ताकतवर बनाने के लिए 6 परमाणु पनडुब्बियां बनाने का कार्य शुरू

सुनील लांबा

नई दिल्ली। हिंद महासागर में चीन पर लगाम लगाने के मकसद से भारत ने नौसैनिक बेड़े को अत्याधुनिक बनाने और न्यूक्लियर शक्ति संपन्न करने के लिए छह और परमाणु पनडुब्बी बनाने पर काम शुरू कर दिया है।





नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने गुरुवार को वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के शुरू होने की पुष्टि की। उन्होंने संकेत दिए कि भारतीय नौसेना अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रस्तावित चतुर्भुज गठबंधन में बड़ी भूमिका निभाने को तैयार है। नेवी डे की पूर्व संध्या पर एडमिरल लांबा ने कई पनडुब्बियों, युद्धपोतों और हथियार प्रणालियों को हासिल करने सहित नौसेना के समक्ष खड़े कई चुनौतीपूर्ण मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नौसेना क्षेत्र में किसी भी पारंपरिक और गैर-पारंपरिक चुनौतियां का सामना करने के लिए तैयार है।

नौसेना से जुड़े परियोजनाओं पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि परियोजना शुरू की गई है और यह एक गोपनीय परियोजना है। मैं इस पर और ज्यादा टिप्पणी नहीं करूंगा। भारत के समुद्री क्षेत्र में दिखते सुरक्षा परिदृश्य पर सुनील लांबा ने कहा कि हिंद महासागर में समुद्री लुटेरों के खिलाफ ऑपरेशन के नाम पर चीन का पनडुब्बियां तैनात करना अजीब है। नौसेना इसे खुद के लिए खतरा मानती है।

वर्ष 2013 से चीनी पनडुब्बियां साल में दो बार आती है। यह पैटर्न अब भी जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में चीनी नौसेना के जहाज पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट पर आते हैं तो यह भारत की सुरक्षा के लिए खतरा होगा।

महिलाओं की युद्धपोत पर तैनाती का विचार

नौसेना चीफ ने कहा कि नेवी में महिलाओं की शानदार मौजूदगी है। आठ ब्रांच में उन्हें परमानेंट कमीशन दिया जाता है। महिला अधिकारी कई ऐसे के कार्य करती है जो युद्धक श्रेणी में आते हैं। युद्धपोतों पर तैनाती को लेकर विचार किया जा रहा है। इसके लिए युद्धपोतों में महिलाओं के लिए विशेष इंतजाम पहले करने होंगे। उन्होंने कहा कि नौसेना देश के समुद्री हितों की रक्षा करने के लिए हर समय तैयार है।

 

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