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भारत के ‘छाताधारी सैनिकों’ ने 1971 के युद्ध में पाक के उड़ा दिए थे होश, जानें 7 खास बातें

युद्ध के तौर-तरीके कितने ही आधुनिक हो जाएं, लेकिन दुश्मन की सुरक्षा घेरे में सेंध लगाने के लिए छाताधारी सैनिकों की बात ही निराली है। इतिहास गवाह है कि छाताधारी सैनिकों ने दुश्मन की जमीन पर उतारकर लड़ाइयों के नतीजे बदल दिए। आज हम आपको छाताधारी सैनिकों के बारे में कुछ रोचक तथ्य बताने जा रहे हैं।





भारत ने टंगैल में पाकिस्तान को दी मात

Tangail- 1971

यह सही है कि भारत में छाताधारी सैनिकों की ट्रेनिंग का काम देर से शुरू हुआ लेकिन वर्ष 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में भारत के छाताधारी सैनिकों ने पाकिस्तान के होश फाख्ता कर दिये। भारतीय सेना की पैराशूट रेजीमेंट और भारतीय वायु सेना ने 11 दिसंबर, 1971 की रात को टंगैल में छाताधारी सैनिकों को पोंगली पुल पर उतारा गया। भारतीय सैनिकों को देख पाकिस्तानी सेना में खलबली मच गई। सिर्फ 748 भारतीय सैनिकों ने ढाका जाने वाला रास्ता काट दिया। पाकिस्तानी सेना को इकट्ठे होने का मौका नहीं मिला और उसे घुटने टेकने पड़े। भारतीय सेना के इस अभियान ने एक नए राष्ट्र बांग्लादेश को जन्म दिया।

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