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सशस्त्र बलों में महिलाओं की कम भर्ती की वजह है कठोर परिस्थिति और प्रतिकूल कार्यदशा

सुरक्षा में महिला प्रहरी
सुरक्षा में महिला प्रहरी (फाइल)

नई दिल्ली। केंद्रीय सशस्त्र बलों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व में इजाफा कम से कम 05 फीसदी करने के सात वर्ष पुराने आदेश को अमलीजामा पहनाने में ज्यादातर सुरक्षा बल कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को छोड़कर केंद्रीय सशस्त्र बलों में महिलाओं का औसत प्रतिनिधित्व 2.29 फीसदी है।





एक अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार गृह मंत्रालय ने संसद की एक समिति को प्रस्तुत नोट में बताया है कि महिलाओं की भर्ती के संबंध सुरक्षा बलों की ओर से कई कठिनाइयों का जिक्र किया गया है। कठोर परिस्थितियों और प्रतिकूल कार्यदशा को महिलाओं की कम भर्ती की वजह बताया है। यह रिपोर्ट मौजूदा संसद सत्र में पेश की गई है।

ITBP  ने कहा है कि उसे समूचे भारत-चीन सीमा की निगरानी करनी होती है, जो ऊंचाई पर स्थित है। यहां दुर्गम और पहाड़ी भाग हैं। यहां पर कठिन व प्रतिकूल मौसम में चौकसी रखने की जिम्मेदारी सुरक्षा बल पर है। उसकी 64 फीसदी सीमा चौकियां अभी भी सड़कों से नहीं जुड़ी हैं। आईटीबीपी के अनुसार सामान्य ड्यूटी संवर्ग में महिलाओं की भर्ती के लिए कोई प्रतिशत निर्धारित करने से दूर-दराज व अलग-थलग पड़े, एकांत सीमावर्ती क्षेत्रों में उनकी तैनाती, आवास तथा अन्य सुविधाओं से अनेक समस्याएं आएंगी। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ने आशंका जाहिर की है कि यद्दपि महिलाओं को भर्ती करने के लिए प्रावधान है। लेकिन जीडी के लिए इच्छुक महिलाएं ढूंढ़ने तथा महिलाओं के प्रतिशत को 05 फीसदी तक लाना कठिन काम हो सकता है।

कार्यदशाओं का कठोर होना है असल वजह

असम राइफल्स ने महिलाओं की भर्ती में बाधाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बटालियनों की तैनाती पूर्वोत्तर के दूर-दराज और अगम्य इलाकों में होने की वजह से प्रतिकूल तथा कठोर कार्यदशाएं महिलाओं की भर्ती के रास्ते में रोड़ा हैं। महिलाओं के लिए अलग आवास व उचित जीवन दशाओं की आवश्यकता भी असम राइफल्स की ओर से बताई गई है।

ये है दिशा-निर्देश ?

साल 2011 में केद्रीय सशस्त्र बलों में महिलाओं का प्रतिनिधि पांच फीसदी करने को गृ मंत्रालय ने परामर्श जारी किया था। 5 जनवरी 2016 को नए निर्देश में कहा गया कि सीमा सुरक्षा बल, सशस्त्र सीमा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल  में 14-15 फीसदी पद महिलाओं के लिए आरक्षत किए जाएं। सीआरपीएफ व सीआईएसएफ में इसे कांस्टेबल स्तर पर 33 फीसदी करने को कहा गया।

संसदीय पैनल ने सुरक्षा बलों का तर्क खारिज करते हुए कहा कि महिलाओं की भर्ती पर पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। उनकी सुविधाजनक तैनाती का प्रयास होना चाहिए।

रक्षक न्यूज की राय:

सशस्त्र बलों में महिलाओं की भर्ती न किए जाने का यह तर्क अब चलने वाला नहीं कि कठिन परिस्थितियां, अनुकूल दशाएं उपलब्ध नहीं है। संसदीय पैनल ने जिस तरह सुरक्षा बलों का तर्क खारिज करते हुए महिलाओं की भर्ती के लिए पर्याप्त कदम उठाने को कहा है, वह पूरी तरह उचित है। हाल के वर्षों में सैन्य बलों में अपनी प्रतिभा के जरिए कुशल मौजूदगी जता कर महिलाओं ने यह बात सभी को बता भी दी है।

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