Air Force

तीनों सेनाओं के लिए 7.4 लाख असाल्ट राइफलें खरीदेगी सरकार

असाल्ट राइफल और मशीनगन

नई दिल्ली। सेना के तीनों अंगों के लिए 7 लाख 40 हजार असाल्ट राइफलें खरीदी जाएंगी। इनकी कीमत करीब 12 हजार करोड़ रुपये होगी। सेना को अत्याधुनिक हथियारों से लैस करने और सीमा पर दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने के मकसद के तहत यह डील होगी। इस रकम से असाल्ट राइफलों के साथ-साथ स्नाइपर राइफलें, लाइट मशीनगन से लेकर नौसेना के लिए एडवांस टारपीडो सिस्टम की खरीद की जाएगी। जम्मू-कश्मीर में सीमा पर पाकिस्तान के साथ चल रही तनातनी के मद्देनजर सैन्य खरीद का यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





रक्षा मंत्रालय के मुताबिक पिछले एक माह में सरकार ने मोर्चे पर तैनात सैनिकों को हथियारों से लैस करने के लिए उनके साथ रहने वाले तीन मुख्य हथियारों राइफल, लाइट मशीनगन और कारबाइन खरीदने की प्रक्रिया तेज कर दी है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) की बैठक में इन हथियारों की खरीद से जुड़े 15,935 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को हरी झंडी दी। प्रस्तावों के अनुसार 1819 करोड़ रुपये लाइट मशीनगनों की खरीद पर खर्च किए जाएंगे। रक्षा मंत्रालय की फास्ट ट्रैक खरीद प्रक्रिया के तहत इनकी खरीद की जाएगी। सेना की तत्कालीन जरूरतों को कम वक्त में पूरा करने के लिए फास्ट ट्रैक खरीद की जाती है।

रक्षा सौदे के इस महत्वपूर्ण फैसले में सबसे बड़ी खरीद 7.4 लाख असाल्ट राइफलों की है। इनकी खरीद तीनों सेनाओं के लिए होगी। इन राइफलों की खरीद और निर्माण परियोजना पर 12,280 करोड़ रुपये खर्च होंगे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, फास्ट ट्रैक के अलावा बाकी लाइट मशीनगनों और असाल्ट राइफलों की खरीद में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कंपनी उनका निर्माण भारत में ही करे।

स्नाइपर राइफलों के लिए वैश्विक टैंडर

डीएसी ने सेना और वायुसेना के लिए 5,719 स्नाइपर राइफलों की खरीद को भी मंजूरी दी है। इस खरीद पर 982 करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी। मारक क्षमता क्षमता वाले स्नाइपर राइफलों की खरीद वैश्विक टेंडर के जरिए होगी। इसके लिए आवश्यक गोलियां आरंभ में तो बाहर से मंगाई जाएंगी मगर बाद में उनका निर्माण भी भारत में ही होगा।

नौसेना के लिए 850 करोड़ की लागत से ‘मरीच सिस्टम’

नौसेना की पनडुब्बी जंगी क्षमता और नौसैनिक युद्धपोतों की मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए डीएसी ने एडवांस टारपीडो डिकाय सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी है। DRDO ने इसके लिए स्वदेशी मरीच सिस्टम विकसित किया है और इसका सफलतापूर्वक टेस्ट भी हो चुका है। इसी मरीच को इंडियन नेवी के रक्षा बेड़े से जोड़ा जाएगा। फैसले के मुताबिक ‘भारत इलेक्ट्रॉनिक्स’ 850 करोड़ रुपये लागत से नेवी के लिए मरीच सिस्टम का निर्माण करेगा।

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