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इस जांबाज़ आर्मी चीफ को लगी थीं 9 गोलियां!

Field Marshal Manekshaw

नौ गोलियां जब पेट को छलनी करते हुए पार हुई। किडनी, लिवर और लंग्स सभी में से खून के फव्वारे छूटने लगे। मशीन गन की 9 गोलियों ने तड़तड़ाते हुए एक जाबांज़ सैनिक को छलनी कर दिया।

नौ गोलियां जब पेट को छलनी करते हुए पार हुई। किडनी, लिवर और फेफड़े सभी जगह से खून के फव्वारे छूटने लगे। मशीन गन की 9 गोलियों ने तड़तड़ाते हुए एक जांबाज़ सैनिक को छलनी कर दिया। 22 फरवरी 1942, द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान म्यांमार के जंगलों में दुश्मनों से लोहा लेते वक्त 9 गोलियों से घायल होने वाले सैनिक कोई और नहीं बल्कि भारत के 8वें सेना प्रमुख और फील्ड मार्शल सैम होर्मूसजी फ्रेमजी जमशेदजी मानेकशॉ थे।





द्वितीय विश्वयुद्ध में युवा कप्तान मानेकशॉ ने केवल दो कम्पनियों की अगुवाई करते हुए सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण पहाड़ी पर कब्ज़ा किया। इस चुनौती को पूरा करते समय एक जापानी सैनिक की मशीन गन से निकली 9 गोलियां फील्ड मार्शल मानेकशॉ के पेट में जा लगी। मानेकशॉ बुरी तरह ज़ख्मी हो गए। मानेकशॉ की हालत देख उनके बचने की उम्मीद नहीं लग रही थी।field_marshal_sam_manekshaw

सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल मानेकशॉ को ‘मिलिट्री क्रॉस’ दिया जाना प्रस्तावित किया क्योंकि मिलिट्री क्रॉस केवल जीवित सैनिक को ही दिया जा सकता है। मानेकशॉ के अर्दली शेर सिंह उन्हे जंग के मैदान से निकाल रेजीमेंट के मेडिकल कैंप ले गए, जहां उनका प्राथमिक इलाज किया गया।

मानेकशॉ की हालत बहुत खराब थी, ऑपरेशन कर सभी गोलियां निकाली गई और ऑपरेशन के दौरान उनके पेट के ज्यादातर अंग भी निकालने पड़े। हालत में सुधार के बाद मानेकशॉ को भारत जाने वाले आखिरी जहाज़ों में से एक में भारत लाया गया।

भारत के सबसे लोकप्रिय सेना प्रमुखों में से एक रहे मानेकशॉ ने 1971 भारत-पाक युद्ध में भी अहम भूमिका निभाई, अपनी निडरता और लीडरशिप क्वालिटी से दुनिया को स्तब्ध कर दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की काबिलियत पर पूरा विश्वास था। मानेकशा खुलकर अपनी बात कहने वालों में से थे।

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उन्होंने एक बार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को मैडम कहने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि यह संबोधन एक खास वर्ग के लिए होता है। मानेकशॉ ने कहा कि वह उन्हें प्रधानमंत्री ही कहेंगे। अपनी निर्णायक क्षमताओं और साहस के बल पर जनरल मानेकशॉ न केवल भारतीय सेना के 8वें सेना प्रमुख बने बल्कि भारतीय सेना का सबसे सर्वोच्च पद फील्ड मार्शल भी हासिल किया।

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