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जानिए, पंजाब में भ्रष्टाचार की निगहबानी किसे सौंपने की तैयारी कर रही सरकार

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) टीएस शेरगिल

चंडीगढ़। देश के दुश्मनों से मुकाबले के लिए जीवन के कई साल सेना में बिता चुके फ़ौजी अब देश के भीतर विकास के दुश्मनों से मुकाबला करेंगे। विकास संबंधी सरकारी योजनाओं पर नजर रखने में इनके इस्तेमाल का प्रयोग पंजाब में कामयाब रहा तो कोई शक नहीं कि बाक़ी सूबे भी इसे अपने यहाँ अमल में लाना चाहेंगे।





प्रयोग के तौर पर शुरू होने वाली इस योजना का नाम भी फ़ौजी स्टाइल का

पंजाब में प्रयोग के तौर पर शुरू होने वाली इस योजना का नाम भी फ़ौजी स्टाइल का है। फ़ौजी ओहदे जीओसी (जनरल ऑफिसर कमांडिंग) की तर्ज पर इसका नाम जीओजी यानि गार्जियंस ऑफ़ गवर्नेंस (Gaurdians of governance-GoG) रखा गया है। पंजाब में सत्ता बदलने के बाद बनी कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार की भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और विकास पर नजर रखने की ये योजना इस दिशा में लिया जाने वाला पहला बड़ा जमीनी कदम माना जा रहा है।

जीओजी का खाका लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) टीएस शेरगिल की अगुवाई में बनाया जा रहा

जीओजी का खाका मुख्यमंत्री के सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) टीएस शेरगिल की अगुवाई में बनाया जा रहा है। इसके मुताबिक़ जिले से लेकर ब्लाक स्तर पर पूर्व सैनिकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। वे स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, पेयजल, बिजली सप्लाई और ऐसी अलग-अलग सेवाओं से जुड़ी योजनाओं पर नजर रखेंगे। खासतौर से ये योजना ग्रामीण क्षेत्रों के लिए हैं जहां पूर्व सैनिकों की काफी आबादी है।

प्रशिक्षित सैनिक वेब पोर्टल पर तमाम सूचनाएं अपलोड करेंगे

प्रशिक्षित सैनिक वेब पोर्टल पर तमाम सूचनाएं अपलोड करेंगे ताकि सटीक और रफ़्तार से सरकार तक पहुंच सकें। अपने-अपने इलाके के अस्पतालों, डिस्पेंसरियों, स्कूलों, पंचायतों, सिंचाई व शेष विभाग, समाज कल्याण के कार्यक्रम की योजनाओं के अमल पर ये पूर्व सैनिक नजर रखेंगे और खामी पाई जाएगी, उसकी जानकारी पोर्टल पर डालेंगे। इतना ही नहीं उनकी दी गई सूचना पर एक निश्चित समय सीमा के भीतर कार्रवाई का भी प्रावधान होगा।

पंजाब ऐसा राज्य है जहां बड़ी आबादी अब भी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। यहाँ 12 हजार से ज्यादा गाँव हैं और सेवानिवृत्त फौजियों की आबादी भी दो लाख से ऊपर है।

जीओजी योजना से फायदे

जीओजी योजना से दो फायदे हैं। एक तो आम जनता से जुड़ी सेवाओं का स्तर सुधारते हुए उनमें से भ्रष्टाचार को दूर करना और दूसरा, सेवानिवृत्त फौजियों के हुनर का इस्तेमाल करते हुए उन्हें व्यस्त भी रखना। अभी यह तय नहीं हुआ है कि उन फौजियों को इस काम के एवज में भत्ता या कोई निश्चित राशि दी जाएगी या नहीं।

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