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1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध से जुड़ी 8 घटनाएं..

1965 में पाकिस्तान ने एक नहीं बल्कि कई मोर्चों से भारत में घुसपैठ की कोशिश की मगर भारतीय सेना ने पाकिस्तान को हर मोर्चे पर मुंह तोड़ जवाब दिया। सितंबर के महीने में वो लड़ाई अपने निर्णायक दौर में पहुंची थी। आज हम आपको बताएंगे 1965 की जंग से जुड़ी कुछ ऐसी घटनाएं जो शायद ही आप जानते हों।





पाकिस्तान ने लॉन्च किया ऑपरेशन डेजर्ट हॉक

कच्छ के रण में पाकिस्तान ने ऑपरेशन डेजर्ट हॉक लॉन्च कर भारत में आपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने की कोशिश की मगर भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के पैर भारतीय ज़मीन से उखाड़ दिए।

>अप्रैल 1965 : चौकियों पर हमलों की शुरुआत

सन 1965 के अप्रैल महीने में पाकिस्तान ने भारतीय चौकियों को निशाना बनाया, जिसका भारत के जवानों ने मुंहतोड़ जवाब दिया।

5 अगस्त 1965 : भारी तादात में जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ

जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा लांघ कर 26,000 – 33,000 पाकिस्तानी सैनिक और मुजाहिद भारतीय सीमा में दाखिल हुए।

15 अगस्त 1965 : जवाबी हमला करते हुए भारतीय सेना पाकिस्तानी सीमा में दाखिल हुई

पाकिस्तानियों कि भारतीय सीमा में घुसपैठ के बाद भारतीय सुरक्षाबलों ने हमले का जवाब देते हुए पाकिस्तानियों को पीछे धकेल दिया और देखते ही देखते भारतीय सेना पाकिस्तानी सीमा में दाखिल हो गई.

28 अगस्त 1965 : हाजी पीर दर्रे और दूसरी पोस्ट पर भारतीय सेना ने कब्जा किया

भारतीय सेना पाकिस्तानी सेना को रौंदती हुई आगे बढ़ती रही और 28 अगस्त को भारतीय सेना ने पाकिस्तान की मुख्य चौकियों में से एक हाजी पीर दर्रे पर तिरंगा झंडा फहरा दिया।

01 सितम्बर 1965 : पाकिस्तान ने ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम किया लॉन्च

बौखलाए पाकिस्तान ने ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम लॉन्च कर जंग को और भड़का दिया।

06 सितम्बर 1965 : भारतीय सेना ने लाहौर और सियालकोट को बनाया निशाना

पाकिस्तानी सेना को उसकी कारगुज़ारी का सबक सिखाने के लिए भारतीय सेना ने लाहौर और सियालकोट को निशाना बना हमले को अंजाम दिया और पाकिस्तान की जड़ों को हिला कर रख दिया.

22 सितम्बर 1965 : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UN) ने किया हस्तक्षेप

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UN) के हस्तक्षेप के बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम हुआ और ताशकंद समझौते के तहत भारत ने पाकिस्तान की जीती हुई चौकियां वापस लौटा दीं।

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