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दिल्ली पुलिस दिवस : पुलिस बल का चेहरा बदल रही है महिला पुलिस, जानें 9 खास बातें

भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्रों में भी वह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं हैं। बिजनेस की बात हो या स्पोर्ट्स की या फिर देश की सुरक्षा की। महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी कर्तव्यनिष्ठा से भरी भूमिका निभा रही हैं। भारतीय पुलिस बल में महिलाओं का होना अब कोई अपवाद नहीं है। वे हर दिन विभिन्न प्रतिबंधों, उचित प्रशिक्षण और सुविधाओं के अभाव से लडती रहीं हैं। फिर भी आज देश में मजबूत महिला पुलिस बल के रूप में एक लाख महिलाएं सफलता के साथ अन्य महिलाओं को पुलिस बल में शामिल होने की प्रेरणा दे रही हैं।





आजादी से पहले भी पुलिस बल का हिस्सा रही हैं महिलाएं

भारत में पहली महिला पुलिस अधिकारी को सन 1933 में केरल की त्रावणकोर रॉयल पुलिस में भर्ती किया गया था। पांच साल बाद, वहां सभी महिला-पुलिस थानों की स्थापना हुई। स्वतंत्रता के बाद 1948 में एक महिला एएसआई और दो महिला हेड कॉन्स्टेबल को दिल्ली पुलिस बल में शामिल किया गया। जल्द ही, गुजरात, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश ने भी पुलिस बल में महिलाओं की भर्ती करनी शुरू कर दी। पुड्डुचेरी की मौजूदा लेफ्टिनेंट गर्वनर और भारतीय पुलिस सेवा की पूर्व पुलिस अधिकारी किरण बेदी 1972 में पहली महिला आईपीएस अफसर बनीं। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1973 में केरल के कोझीकोड में महिला थाने का उद्घाटन किया।

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