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राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड्स क्यों होते हैं ‘बेस्ट गार्ड’, जानिए कुछ और रोचक तथ्य !

राष्ट्रपति-रामनाथ-कोविंद

नई दिल्ली। रामनाथ कोविंद ने भारत के 14वें राष्ट्रपति की कमान संभाल ली है। संसद के सेंट्रल हॉल में मंगलवार को एक गरिमापूर्ण समारोह में देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर ने कोविंद को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। राष्ट्रपति देश की सेनाओं के सुप्रीम कमांडर तो होंगे ही साथ ही इन्हीं सेनाओं की सुरक्षा के साए में भी रहेंगे। राष्ट्रपति भवन से संसद भवन के बीच करीब 20 मिनट का रास्ता राष्ट्रपति ने स्पेशल बॉडीगार्ड के साथ तय करते हैं। राष्ट्रपति की सुरक्षा, देश में बाकी लोगों को मिली सुरक्षा से काफी अलग और खास मानी जाती है।





राष्ट्रपति का अंगरक्षक बनना भी सैनिकों के लिए किसी सम्मान से कम नहीं होता है। आइए नए राष्ट्रपति चुने जाने के मौके पर आपको राष्ट्रपति की सुरक्षा के बंदोबस्त और उनके बॉडीगार्ड्स से जुड़ी कुछ खास बातें जा रहे हैं।

राष्ट्रपति की सुरक्षा में लगे गार्ड्स की वो अहम जानकारियां:

छह फिट होनी चाहिए लंबाई

सुरक्षाकर्मी

जिस सुरक्षाकर्मी की लंबाई छह फीट नहीं है तो फिर उन्‍हें मंजूरी नहीं मिलती (फाइल फोटो)

राष्‍ट्रपति की सुरक्षा में जो सैनिक या अफसर तैनात होते हैं उनकी लंबाई काफी मायने रखती है। अगर उनकी लंबाई छह फीट नहीं है तो फिर उन्‍हें मंजूरी नहीं मिलती। स्‍वतंत्रता से पहले यह योग्‍यता छह फीट तीन इंच थी।

देश के तीनों सेनाओं के प्रमुख होते हैं राष्‍ट्रपति 

घुड़सवार-गार्ड्स

राष्ट्रपति की सुरक्षा में घुड़सवार गार्ड्स

राष्‍ट्रपति देश की तीनों सेनाओं आर्मी, एयरफोर्स और नेवी के प्रमुख होते हैं। उनकी सुरक्षा में जो सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं उन्‍हें प्रेसीडेंट्स बॉडीगार्ड्स यानी पीबीजी कहते हैं। यह भारतीय सेना की घुड़सवार रेजिमेंट का हिस्‍सा होती है। साथ ही यह सेना की सर्वोच्‍च यूनिट होती है। इसका प्राथमिक रोल राष्‍ट्रपति की सुरक्षा करना और हर पल उनके साथ चलना है। यह यूनिट राष्‍ट्रपति भवन में बेस्‍ड होती है।

पहली बॉडीगार्ड यूनिट सन 1773 में गठन

पहली बॉडीगार्ड यूनिट

वर्ष 1773 में पहली बॉडीगार्ड यूनिट तैयार की गई थी (फाइल फोटो)

भारत में पहली बॉडीगार्ड यूनिट सन 1773 में उस समय तैयार की गई थी जब देश में यूरोपियन ट्रूप्‍स को र्इस्‍ट इंडिया कंपनी बतौर पैदल सेना भर्ती किया गया था। उस समय वॉरेन हेस्टिंग्‍स गर्वनर जनरल थे और उन्‍होंने ही सितंबर 1773 में इसका गठन किया था।

हेस्टिंग्‍स मुगल हाउस से 50 ट्रूप्‍स को चुना

राष्ट्रपति-के-गार्ड्स

मुगल हाउस से 50 ट्रूप्‍स को इसके लिए चुना गया था (फाइल फोटो)

हेस्टिंग्‍स ने मुगल हाउस से 50 ट्रूप्‍स को इसके लिए चुना था। इसके बाद सन 1760 में सरदार मिर्जा शानबाज खान और खान तार बेग ने इसे आगे बढ़ाया।

राजा चैत सिंह ने की 100 सैनिकों की संख्‍या

राजा चैत सिंह ने बढ़ाई ताकत

राजा चैत सिंह ने यूनिट की ताकत बढ़ाते हुए इसकी संख्या 100 की (फाइल फोटो)

इसके बाद बनारस के राजा चैत सिंह ने इसमें 50 और ट्रूप्‍स को जगह दी और इसके बाद यूनिट की ताकत 100 सैनिकों की हो गई थी।

राष्‍ट्रपति की बॉडीगार्ड यूनिट का पहला कमांडर

राष्‍ट्रपति के बॉडीगार्ड

राष्‍ट्रपति की बॉडीगार्ड यूनिट का पहला कमांडर ब्रिटिश था (प्रतीकात्मक)

राष्‍ट्रपति की बॉडीगार्ड यूनिट का पहला कमांडर ब्रिटिश था और उनका नाम था कैप्‍टन स्‍वीनी टून। स्‍वीनी ईस्‍ट इंडिया कंपनी के सम्‍मानित सैनिक थे। उनके अलावा उनके साथ बतौर जूनियर लेफ्टिनेंट सैम्‍युल ब्‍लैक थे।

प्रेसीडेंट की सुरक्षा में कैप्‍टन से लेकर पैराट्रूपर्स तक

राष्ट्रपति की सुरक्षा में गार्ड्स

प्रेसीडेंट की सुरक्षा में कैप्‍टन से लेकर पैराट्रूपर्स तक

राष्‍ट्रपति की सुरक्षा में तैनात बॉडीगार्ड्स की पुरानी यूनिट में एक कैप्‍टन, एक लेफ्टिनेंट, चार सार्जेंट्स, छह दाफादार, 100 पैराट्रूर्प्‍स, दो ट्रंपटर्स और एक बग्‍घी चालक होता था।

राजपूतों और जाट सिख से सजी सुरक्षा

राष्‍ट्रपति की सुरक्षा गार्ड्स

राष्‍ट्रपति की सुरक्षा में तैनात
गार्ड्स के लिए सबसे पहले सेना की जाट, सिख और राजपूतों को तरजीह दी जाती है

वर्तमान समय में राष्‍ट्रपति की सुरक्षा में जो बॉडीगार्ड्स तैनात होते हैं उनमें सेना की जाट, सिख और राजपूतों को प्राथमिकता दी जाती है। यह सैनिक हरियाणा, पंजाब और राजस्‍थान से आते हैं।

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