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अमेरिकी फैसले का दूरगामी असर, भारत ने स्वागत किया

भारत-अमेरिका का फ्लैग

नई दिल्ली। अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारत को उच्च तकनीक वाले तकनीकी उत्पादों को हासिल करना आसान बनाने के फैसले का भारत ने स्वागत किया है। इस फैसले से भारत रक्षा, परमाणु व अंतरिक्ष क्षेत्र की कई दोहरे इस्तेमाल वाले तकनीकी उपकरण और अति उच्च तकनीक वाले संवेदनशील रक्षा साज सामान को आयात करने में कई तरह के लाइसेंस हासिल करने की मजबूरी नहीं रहेगी।





उल्लेखनीय है कि आगामी छह सितम्बर को भारत और अमेरिका के विदेश व रक्षा मंत्रियों की टू प्लस टू वार्ता होने वाली है। इसके पहले अमेरिका द्वारा लिया गया उक्त फैसला काफी अहम माना जा रहा है। ताजा फैसले ने टू प्लस टू वार्ता के लिये अनुकूल माहौल बनाने की कोशिश की है। इसके पहले वाशिंगटन की रिपोर्टों में कहा गया था कि अमेरिका द्वारा रूस के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों का भारत रूस रक्षा सम्बन्धों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

वाशिंगटन में हिंद प्रशांत बिजनेस फोरम की बैठक में अमेरिकी वाणिज्य मंत्री विलबर रास द्वारा किये गए उक्त आशय के ऐलान में कहा गया है कि अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय के सामरिक व्यापार मंजूरी लाइसेंस अपवाद के पहले टियर में शामिल कर लिया है। टियर-1 में वही देश शामिल हैं जो अमेरिकी अगुवाई वाले सैन्य संगठन नाटो ( उत्तरी अतलांतिक संधि संगठन) के सदस्य हैं।

अमेरिका के इस फैसले का स्वागत करते हुए यहां विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि हम अमेरिका के इस फैसले का स्वागत करते हैं। प्रवक्ता के मुताबिक भारत को अमेरिका ने पहले ही अपना मेजर डिफेंस पार्टनर घोषित किया है इसलिये ताजा फैसला इसे एक तार्किक मुकाम पर पहुंचाता है।

प्रवक्ता के मुताबिक विभिन्न बहुराष्ट्रीय व्यापार नियंत्रण व्यवस्थाओं में भारत एक जिम्मेदार सदस्य देश की तरह रहता है जिसे अपने ताजा फैसले से अमेरिका ने मान्यता दी है। प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका के ताजा फैसले से रक्षा व उच्च तकनीक के क्षेत्रों में भारत औऱ अमेरिका के बीच व्यापार औऱ सहयोग और सुविधाजनक हो जाएगा। प्रवक्ता ने कहा कि हम इस फैसले को जल्द से जल्द व्यवहार में लाने की प्रतीक्षा करेंगे।

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