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केन्द्र सरकार के इस फैसले से बढ़ेगी अंतरिक्ष में देश की ताकत

सेटेलाइट

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भारतीय अंतरिक्ष संगठन (ISRO) को 10,911 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दे दी गई। अगले चार वर्षों में इस पैसे का इस्तेमाल  30 PSLV और 10 GSLV Mk III rockets को लाँच करने के लिए किया जायेगा। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक ISRO के सबसे भारी रॉकेट 10 GSLV Mk III की 10 लाँचिंग के लिए 4,338 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। केन्द्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने अखबार को बताया, हम चार टन से ज्यादा वजनी सैटेलाइट्स लाँच कर सकेंगे। अंतरिक्ष तकनीक में हमारा यह एक बड़ा कदम होगा। इसके बाद वजनी सैटेलाइट्स लाँच करने के लिए हमें विदेशी सहयोग पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।





उन्होंने कहा, GSLV Mk III  मेक इन इंडिया कार्यक्रम से जुड़ा है। इस कार्यक्रम की सहायता से छोटे विदेशी सैटेलाइट्स लाँच तो करेगा ही साथ ही चार टन से ज्यादा वजनी सैटेलाइट्स भी लाँच कर पाएगा। यह कार्यक्रम मोदी सरकार के पिछले तीन-चार वर्षों के दौरान विकसित हुआ है।

GSLV Mk III निरंतरता कार्यक्रम-चरण 1परिचालन उड़ानों का पहला चरण है जो देश की उपग्रह संचार आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु 4 टन वर्ग के संचार उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में सक्षमता प्रदान करेगा। जीएसएलवी एमके–III के परिचालन से 4 टन संवर्ग के संचार उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में सक्षम होने के कारण देश आत्मनिर्भर हो जाएगा और जिससे हमारे देश के अंतरिक्ष के बुनियादी ढांचे को बनाए रखने एवं मजबूत करने तथा विदेशी प्रक्षेपण पर निर्भरता को कम करने में मददगार साबित होगा।

GSLV Mk III निरंतरता कार्यक्रम-चरण 1 के अंतर्गत ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के लिए उच्च प्रवाह उपग्रहों की राष्ट्रीय मांग को पूरा करने,  डीटीएच,  वीसैट और टेलीविजन प्रसारणकर्ताओं के लिए ट्रांसपोंडर की उपलब्धता को बढ़ाने तथा बनाए रखने हेतु संचार उपग्रहों की प्रक्षेपण आवश्यकता को पूरा करेगा।

GSLV Mk III निरंतरता कार्यक्रम-चरण 1 जीएसएलवी एमके–III प्रक्षेपण वाहन की परिचालन उड़ानों का पहला चरण होगा और इसकी मंजूरी से 2019-2024 की अवधि के दौरान उपग्रहों के प्रक्षेपण को पूरा करने में सहायक सिद्ध होगा।

मंत्रिमंडल ने 30 PSLV रॉकेट्स लाँच करने के लिए 6,573 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। यह कार्यक्रम पृथ्‍वी अवलोकन, दिशा सूचक और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए सेटेलाइट के प्रक्षेपण की आवश्‍यकता को भी पूरा करेगा।

 

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