DEFENCE

Special Report: भारत के साथ रक्षा सहयोग गहरा करेगा जर्मनी

पीएम मोदी और जर्मन चांसलर

नई दिल्ली। भारत और जर्मनी  ने सामरिक  साझेदार के नाते आपसी रक्षा सहय़ोग को और गहरा करने की जरूरत पर जोर दिया है। जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्कल और भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच यहां शुक्रवार को  हुई शिखर वार्ता के बाद जारी साझा बयान में रक्षा सहयोग को  विस्तार देने की जरूरत का जिक्र करते हुए कहा गया है कि यह  वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के इरादे से होना चाहिये।





जर्मनी की चांसलर भारत की दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर 31 अक्टूबर की रात को पहुंचीं। एक नवम्बर को उनकी राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री मोदी ने औपचारिक अगवानी की। बाद में दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत में आपसी हितों के क्षेत्रीय सुरक्षा और सामरिक मसलों पर अकेले में और फिर शिष्टमंडल स्तर की बातचीत में चर्चा हुई।

इस बातचीत के दौरान दोनों पक्षों में सहमति हुई कि आपसी रक्षा सहयोग को विस्तार देने के लिये रक्षा मंत्री स्तर पर हर दो  साल पर बैठक होगी। इसके लिये दोनों देशों के रक्षा मंत्री एक दूसरे के यहां दौरे करेंगे। दोनों देशों के शिष्टमंडलों ने दिवपक्षीय रक्षा सहयोग के समझौते को व्यवहार में लाने के  बारे में चर्चा की। इस बारे में समझौता इस साल के शुरू में हुआ था।  दोनों शिखऱ नेताओं ने उम्मीद जाहिर की इस समझौते को लागू करने से  सुरक्षा और सामरिक सहयोग के मसलों पर मौजूदा आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अलावा दोनों देश वैश्विक औऱ क्षेत्रीय व समुद्री और साइबर सुरक्षा के मसलों पर भी विशेष ध्यान देंगे। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षण ट्रेनिंग में भी सहयोग करेगे। जर्मनी इस प्रस्ताव पर भी सहमत हुआ है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक  रक्षा तकनीक और साज सामान का निर्यात भारत को करेगा। दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच गहरे सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।  भारत में रक्षा साज-सामान के उत्पादन के लिये  तमिलनाडू और उत्तर प्रदेश में बनाए गए दो रक्षा गलियारों में जर्मनी अपने उद्योगों को निवेश करने के लिये प्रोत्साहित करेगा।

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