DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: रक्षा उद्योगों की चिंताएं दूर करने का भरोसा

भारतीय सेना
फाइल फोटो

नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय ने रक्षा साज-सामान बनाने वाले उद्योगों को भरोसा दिलाया है कि रक्षा उत्पादन से सम्बन्धित सभी चिंताओं को दूर किया जाएगा। यहां वाणिज्य संगठन फिक्की द्वारा आयोजित एक बैठक में रक्षा उत्पादन विभाग के सचिव सुभाष चंद्र ने कहा कि  उद्योग और सेनाओं  के बीच सहयोग आज की जरूरत है।





फिक्की द्वारा  भारतीय थलसेना के सहयोग से आयोजित आर्मी मेक प्रोजेक्ट्स- 2019 को सम्बोधित करते हुए सुभाष चंद्र ने कहा कि  सैन्य साज सामान के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये उद्योगों की चिंताओं को ध्यान में रखा जाता है। लेकिन काम करने की प्रक्रियाओं को समझने के लिये दोनों पक्षों के बीच तालमेल की जरूरत है। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं को उद्योग जगत के लिये अपने द्वार खोलने चाहिये ताकि विभिन्न मसलों पर एक दूसरे की चिंताओं को दोनों पक्ष समझ सकें।

इस मौके पर थलसेना के वाइस चीफ  मनोज मुकुंद नरवाने ने कहा कि सरकार स्वदेशीकरण औऱ ‘मेक इन इंडिया’ के लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारे पास क्षमता है लेकिन दुर्भाग्य से हमने इनका विकास नहीं किया है और हम समय के साथ नहीं बदले हैं। अब वक्त आ गया है कि आत्मनिर्भर होने के लिये हमारे भीतर जो क्षमता है उसका लाभ उठाएं।

 आयात पर निर्भरता घटाने के लिये थलसेना के वाइस चीफ ने कहा कि  हमें शोध एवं विकास पर अधिक खर्च करना होगा। उन्होंने कहा कि हम तभी आगे बढ़ पाएंगे जब  शोध एवं विकास पर खर्च करेंगे।  शोध एवं विकास पर कम खर्च ही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है। जब तक हम भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतें को नहीं समझेंगे हम हमेशा लोगों का पीछा ही करते रह जाएंगे।

फिक्की की डिफेंस कमेटी के चेयरमैन जे डी पाटिल ने कहा कि मेक प्रोसेस के वांछित लक्ष्यों को हासिल करने के लिये सशस्त्र सेनाओं और रक्षा उद्योग को साथ आना होगा। उन्होंने कहा कि 1991 के बाद से कुछ खास सेक्टरों में भारतीय उद्योग नाटकीय तरीके से चमका है जिसे रक्षा क्षेत्र में भी दोहराया जा सकता है। फिक्की के कर्नल एच एस शंकर ने कहा कि रक्षा साज सामान बनाने के लिये उद्योग जगत को काफी जोखिम उठाना पड़ता है इसलिये रक्षा मंत्रालय को निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज करनी होगी।

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