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स्पेशल रिपोर्ट: भारत की घातक ब्रह्मोस मिसाइल को आयात कर सकता है थाईलैंड

ब्रह्मोस-मिसाइल
फाइल फोटो

नई दिल्ली। भारतीय सेनाओं की सबसे घातक मिसाइल ब्रह्मोस का आयात करने वाला थाईलैंड पहला देश हो सकता है। भारत और रूस द्वारा साझा तौर पर विकसित और उत्पादित ब्रह्मोस मिसाइलों  की  भारत की तीनों सेनाओं  में तैनाती हो चुकी है और पिछले कई सालों से दक्षिण पूर्व एशिया के देश इसे हासिल करने में रुचि ले रहे हैं।





यहां रक्षा सूत्रों ने संकेत दिया है कि थाईलैंड के अधिकारियों की इस बारे में भारतीय अधिकारियों से बातचीत चल रही  है। सूत्रों ने कहा कि यह सौदा अगले साल  के शुरू में सम्पन्न हो सकता है। थाईलैंड ने कुछ साल पहले इस मिसाइल को खऱीदने में रुचि ली थी लेकिन गत दिसम्बर में थाईलैंड के नौसेना प्रमुख एडमिरल रुडिट के भारत दौरे के बाद ब्रह्मोस मिसाइल के सौदे के बारे में बातचीत आगे बढ़ी है।

ब्रह्मोस एरोस्पेस के एक आला अधिकारी कमोडोर एस के अय्यर ने कहा था कि ब्रह्मोस मिसाइल को हासिल करने में  मलेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर सहित कई देशों ने रुचि ली है। इनमें सबसे अग्रणी वियतनाम है लेकिन चीन की संवेदनशीलता को देखते हुए भारत वियतनाम को ब्रहमोस मिसाइलों की सप्लाई करने से झिझक रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल आवाज से 2.8 गुना अधिक गति से लक्ष्य को भेद सकती है। इसकी मारक दूरी 290 किलोमीटर है लेकिन इसकी 500 किलोमीटर मारक दूरी वाली किस्म का भी विकास किया जा रहा है।

सूत्रों ने बताया कि थाईलैंड के नौसेना प्रमुख  ने गत दिसम्बर में भारत दौरे में  अपने नौसैनिक बेड़े  में शामिल डार्नियर समुद्री टोही  विमानों की मरम्मत और देखरेख का आग्रह भारत से किया है।  थाईलैंड की नौसेना ने भारत से आग्रह किया है कि थाईलैंड की नौसेना की टोही क्षमता बढ़ाने में मदद करें। सूत्रों ने बताया कि थाईलैंड  ने युद्धपोत निर्माण और डिजाइन में भी भारत की मदद मांगी है। थाईलैंड के तटीय रेडार नेटवर्क को भारत के तटीय रेडार  नेटवर्क से एकीकृत करने पर भी बातचीत चल रही है।

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