DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: साइबर हमलों से निबटने का अभ्यास सम्पन्न

साइबर क्राइम
फाइल फोटो

नई दिल्ली। भारत पर सीधे सैन्य हमला किये बिना भी साइबर हमलों से तबाह किया जा सकता है। इससे बचने के लिये भारतीय सेनाओं ने कमर कसी है और इस तरह का पहला साइबर युद्ध अभ्यास यहां 29 और 30 अप्रैल को सम्पन्न हुआ।





गौरतलब है कि साइबर हमलों से किसी जनसेवा वाली इंटरनेट प्रणाली जैसे विमान सेवा रेल आरक्षण सेवा, विद्युत सप्लाई सेवा , आदि को भंग किया जा सकता है औऱ इसके जरिये पूरे देश में जन जीवन अस्तव्यस्त किया जा सकता है। साइबर हमलों के जरिये रक्षा प्रणालियोंको भी ध्वस्त किया जा सकता है जिससे खास तरह की शस्त्र प्रणाली निष्क्रिय की जा सकती है।

यहां इस बारे में थलसेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि भारतीय रक्षा विश्वविद्यालय (आईडीयू)  के निदेशालय ने साइबर हमलों का माहौल तैयार कर इसका समुचित जवाब देने का अभ्यास किया। इस अभ्यास में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय ( एनएससीएस) , नैशनल टेकनिकल रिसर्च आर्गेनाइजेशन( एनटीआरओ ), कम्पूय्टर इमरजेंसी रिस्पोंस टीम ( सर्ट-इन ) , रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठऩ (DRDO) , नैशनल इनफार्मेटिक्स काउंसिल (एऩआईसी) उद्योग औऱ अकादमिक जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस अभ्यास के पहले विशेषज्ञों ने दो दिनों तक एक गोष्टी का आयोजन किया जिसमें साइबर हमलों से निबटने की श्रेष्ठ प्रक्रियाएं तय की गईं थी। यह प्रक्रिया हालात के आकलन और अपनी क्षमता के अनुरुप विभिन्न विकल्पों के आधार पर तय की गई थी। इस अभ्यास का  आयोजन खतरों का  आकार , भ्रष्ट सूचना का  फैलाव  , साइबर चेतना  का प्रसार ,तैयारी और तालमेल एकीकृत अंतरराष्ट्रीय जवाब और अंतर सरकारी साझेदारी से किया गया।

एकीकृत सैन्य बल( सी आई डी एस )  प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पी एस राजेश्वर ने इस गोष्ठी में मुख्य भाषण दिया और साइबर हमलों से निबटने के लिये समुचित तैयारी की चर्चा की। इंडियन डिफेंस यूनीवर्सिटी द्वारा यह अभ्यास अब सालाना आयोजित किया जाएगा। इस अभ्यास में मित्र देशों के विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया जाएगा ताकि साथ मिल कर संयुक्त रुप से क्षमताओं का निर्माण कर सकें।

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