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स्पेशल रिपोर्ट: हथियारों का आयात घटाएं- राजनाथ सिंह

गृह मंत्री राजनाथ सिंह
फाइल फोटो

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिये प्राइवेट सेक्टर की बढ़ी हुई भागीदारी पर जोर दिया है और कहा है कि हमें आयात पर अपनी निर्भरता घटानी होगी।





यहां भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण की योजना पर आयोजित एक सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि हमें विदेशी निर्माताओं पर अपनी निर्भरता धीरे-धीरे खत्म करनी होगी। राजनाथ सिंह ने प्राइवेट सेक्टर से आग्रह किया कि रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया की भारत सरकार की नीतियों का लाभ  उठाएं। उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर को सैन्य बलों, सार्वजनिक रक्षा उपक्रमों और आय़ुध कारखानों के साथ तालमेल बढ़ाना होगा।

उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने की राह में प्राइवेट सेक्टर को जो भी दिक्कते महसूस हो रही हों उन्हें दूर करने के लिये सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने उद्योग जगत से कहा कि किसी अल्पकालिक लाभ की उम्मीद के बदले दीर्घकालीन लाभ के बारे में सोच कर चलें। रक्षा मंत्री ने कहा कि वायुसेना तकनीकी तौर पर विकसित और काफी ताकतवर सेना है। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिये बिना कहा कि हाल में पड़ोस के इलाके में जिन ठिकानों पर हमले किये गए हैं वे भारतीय वायुसेना की पहुंच और क्षमता का बखान करते हैं।

उन्होंने कहा कि थलसेना औऱ नौसेना के साथ ही भारतीय वायुसेना को  तकनीकी विकास के साथ चलना होगा।  मेक इन इंडिया के लिये सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑटोमेटिक रास्ते से 49 प्रतिशत विदेशी निवेश को मंजूरी दी गई है और सौ प्रतिशत  भागीदारी को भी खास मामलों में मंजूरी दी जाती  है। उन्होंने कहा कि विदेशी कम्पनियों के लिये संयुक्त उद्मम के जरिये कई अवसर हैं जो डिफेंस आफसेट नियमों के तहत आते हैं। राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि डिफेस आफसेट को लागू करने की प्रक्रिया को सुनियोजित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर अपने यहां विकसित शस्त्र प्रणालियों का परीक्षण सरकारी उपक्रमों में  कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकारी कोशिशों और उद्योग जगत के बीच तालमेल से भारत को रक्षा क्षेत्र में अग्रमी देश बनाने का सपना पूरा हो सकता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि औद्योगिक सूची जारी करने के लिये  रक्षा उत्पादों की सूची में संशोधन किया गया है। औद्योगिक लाइसेंस के लिये  आरम्भिक वैधता को तीन साल से बढाकर 15 साल के लिये कर दिया गया है औऱ इसे तीन साल औऱ बढ़ाने का भी प्रावधान भी  रखा गया है।

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