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स्पेशल रिपोर्ट: कामोव हेलीकाप्टर के हिस्से भारत में ही बनेंगा

बेंगलूर।  रूसी हेलीकाप्टर कामोव-226टी के विभिन्न कलपुर्जे और हिस्से भारत में ही बनाने के लिए रूसी कम्पनी रोजटेक ने बेंगलूर में कई भारतीय कम्पनियों के साथ समझौते किये। गौरतलब है कि भारतीय सेनाओं के लिये कामोव-226 टी हेलीकाप्टर खरीदने का आर्डर भारतीय रक्षा मंत्रालय ने रूसी कम्पनी को दिया है।





यहां चल रही एयरो इंडिया -2019 रक्षा प्रदर्शनी के दौरान रूसी कम्पनी के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। रूसी कम्पनी रोजटेक के साथ किये गए समझौते के तहत रूस में 60 कामोव-226टी हेलीकाप्टरों की एसेम्बली कर भारतीय सेनाओं को सप्लाई की जाएगी जब कि बाकी 140 का उत्पादन भारत में होगा। जिन भारतीय कम्पनियों के साथ समझौते किये गए हैं उनमें एलकाम, वालदेल अडवांस्ड टेकनालाजीज, डाइनामिटिक टेकनालाजीज , इंटीग्रेटेड हेलीकाप्टर सर्विसेज और भारत फोर्ज शामिल हैं। इन कम्पनियों द्वारा भारत में हेलीकाप्टर के विभिन्न हिस्से जैसे फ्यूजीलाज, ब्लेड, रेडियोस्टेशन और लैंडिंग गियर बनाए जाएंगे।

रूसी हेलीकाप्टर कम्पनी भारतीय सेनाओं के लिये हाल में जारी 111 नेवल युटिलिटी  हेलीकाप्टरों के टेडर में भी भाग लेगी। कम्पनी के अधिकारियों ने कहा कि कामोव-226 टी के हिस्से भारत में बनने से नेवल यूटिलिटी हेलीकाप्टरों की सप्लाई औऱ मेनटेनेंस भी आसान हो जाएगी। कामोव-226टी हेलीकाप्टरों का न्यूनतम टेकआफ वजन 3.6टन है औऱ यह एक टन वजन के भार अपने साथ ले  जा सकता है। इसमें छह लोगों का परिवहन आसानी से हो सकता है। कामोव-226टी हेलीकाप्टर पर्यावरण के अनुकूल है और इसमें अत्याधुनिक एवियानिक्स सूट लगे हैं। अपने वर्ग में यह सर्वेश्रेष्ठ हेलीकाप्टर माना जाता है।

रूसी हेलीकाप्टर होल्ड़िंग कम्पनी  के महानिदेशक आंद्रेई बोगिंस्की ने यहां इन समझौतों पर हस्ताक्षर के बाद कहा कि कामोव -226टी प्रोजेक्ट के नये चरण की शुरुआत हमने कर दी है। इसके लिये भारतीय कम्पनियों में निर्माताओं की पहचान की गई है। बोगिस्की ने  भरोसा जाहिर किया कि भारतीय कम्पनियों के साथ जो समझौते हुए हैं उनसे भारत में कामोव-226टी के उत्पादन के भावी कार्यक्रमों में भारी मदद मिलेगी। इससे रूसी और भारतीय कम्पनियों को परस्पर लाभ होगा।

बोगिंस्की ने कहा कि कामोव-226टी के हिस्सों का स्थानीय उत्पादन का कार्यक्रम भारत सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा देगा। उन्होंने भरोसा जाहिर किया कि जो हेलीकाप्टर भारत में बनाए जाएंगे उनकी भारत में काफी मांग होगी और तीसरे देशों में भी इनका निर्यात हो सकता है।

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