DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: आयुध कारखानों के उत्पाद घटिया औऱ महंगे

आयुध कारखाना
फोटो सौजन्य- गूगल

नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय के तहत कार्यरत आर्डनेंस फैक्टरी बोर्ड (OFB)  को आर्डनेंस फैक्टरी कॉरपोशन लि. में बदला जाएगा। इस फैसले की वजह  रक्षा मंत्रालय ने यह बताई है कि आयुध कारखानों का कामकाज काफी ढीला चल रहा था औऱ अपना दायित्व पूरा करने में यह काफी अक्षम हो चुका था।





यहां रक्षा मंत्रालय के  प्रवक्ता ने बोर्ड  को कारपोरेशन में बदलने की वजह बताते हुए कहा कि इनके कारखाने वक्त पर सेनाओं को अपना आर्डर पूरा नहीं करते थे औऱ  इनके उत्पाद घटिया क्वालिटी के होने लगे थे। चूंकि सेनाओं को आर्डनेंस फैक्टरी बोर्ड से ही  अपनी जरुरतों के उत्पद हासिल करने होते  हैं  इसलिये आयुध कारखानों को एक बंधक बाजार मिला हुआ था जिसका नाजायज फायदा आयुध कारखाने उठा रहे थे।

प्रवक्ता ने बताया कि विगत में आयुध कारखाना बोर्ड को कॉरपोरेशन में बदलने की सिफारिशें सरकार द्वारा गठित कई समितियों ने की थीं। इन्हीं सिफारिशों को ध्यान में रख कर ही आयुध कारखाना बोर्ड को कारपोरेशन में बदला गया। गौरतलब है कि आर्डनेंस फैक्टरी बोर्ड के कर्मचारियों ने सरकार के इस फैसले का  विरोध करने का फैसला  किया है औऱ इसके खिलाफ  हड़ताल करने का फैसला किया है।

रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि आयुध कारखाना बोर्ड रक्षा उत्पादन विभाग के तहत काम करते हैं। इसका मुख्यालय कोलकाता में है। इसके मुख्य उत्पाद टैंक, बख्तरबंद वाहन, फील्ड गन, छोटे हथियार, गोलाबारूद आदि हैं। ये कारखाने सैनिकों के लिये वर्दी, टेंट, जूते आदि भी बनाते हैं। इनके मुख्य ग्राहक तीनों सेनाएं हैं। हालांकि हाल में कोशिशें की गई हैं कि आयुध कारखानों के  उत्पाद मार्केट में भी बिके।  सरकार ने ऐसे 275 उत्पादों की सूची  जारी की  है जो आम बाजार में उपलब्ध हैं औऱ सेनाएं उन्हें वहां से भी खरीद सकती हैं।

बोर्ड के कारखानों में ये ही उत्पाद काफी अधिक कीमत पर सप्लाई किये जाते है। इनकी मेनटेनेंस की लागत भी काफी होती है। इन कारखानों में कुछ नया आविष्कार करने को प्रोत्साहित नहीं किया जाता है। सबसे परेशानी की बात सेनाओं के लिये यह होती है कि बोर्ड के कारखाने वक्त पर इनकी सप्लाई नहीं करते औऱ इसके लिये उन्हें कोई हर्जाना भी नहीं देना होता।

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