DEFENCE

खास रिपोर्ट: नई नीति से सेनाओं को हथियार मिलने में अब देरी नहीं

आधुनिक हथियारों से होते है लैस
प्रतीकात्मक

नई दिल्ली। सेना मुख्यालयों को सैनिक साज-सामान खरीदने के अधिक अधिकार दिये जाने के बाद से सैन्य प्रणालियों की खरीद के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। गौरतलब है कि रक्षा मंत्रालय ने सेना मुख्यालयों को 300 करोड़  रुपये मूल्य तक के साज-सामान अपने स्तर पर ही करने की छूट दो साल पहले दी थी। सेना मुख्यालय अब 500 करोड़ रुपये तक के सैनिक साज-सामान हासिल कर सकते हैं।





यहां रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि  सैन्य मुख्यालयों के अलावा कमांड औऱ निचली इकाइयों के स्तर पर भी तात्कालिक जरूरत वाले हथियारों औऱ उनके कलपुर्जों की खरीद के अधिकार दिये गए हैं जिससे रक्षा बजट का बेहतर इस्तेमाल होने लगा है। साल 2016 से 2018 के दौरान  सैन्य मुख्यालयों को अपने स्तर पर ही कम मूल्य वाले सैनिक साज सामान खरीदने की मंजूरी दी गई है।

इससे आपात जरूरत वाली सैन्य प्रणालियों औऱ गोलाबारूद को वक्त पर हासिल करने में सेना मुख्यालयों को सहूलियत होने लगी है। पूंजीगत मामलों में साल 2015-17 के दौरान सेना मुख्यालयों को 50 करोड़ तक के सैनिक साज सामान अपने स्तर पर खरीदने की अनुमति थी। साल 2017-19 के दौरान इस खरीद सीमा को 150 करोड़ रुपये कर दिया गया। इसके बाद साल 2019-20 के दौरान सेना मुख्यालयों को 300 करोड़ रुपये मूल्य तक के सैनिक साज सामान खरीदने का अधिकार दिया गया।

इन नीतिगत फैसलों का नतीजा यह हुआ है कि साल 2012-15 के दौरान जहां  सेना मुख्यालयों के 327 खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी गई वहीं 2015-17 के दौरान केवल 132 प्रस्ताव ही रक्षा मंत्रालय की  मंजूरी  के लिये भेजी गई।

इस नीतिगत फैसले का सबसे ज्यादा लाभ वायुसेना ने उठाया जिसने  अपनी जरूरत के 80 से 85 प्रतिशत सामान अपने स्तर पर फैसले लेकर खरीदे।

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