DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: रक्षा उत्पादन में भारत को बनाएं विश्व नेता

राजनाथ सिंह

नई दिल्ली। रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ में अपना अहम योगदान देने के लिये केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा शोध एवं विकास संगठन (DRDO) के वैज्ञानिकों की सराहना की है और उनसे आह्वान किया है कि देश को अत्याधुनिक रक्षा तकनीक से लैस करें। उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन में भारत को विश्व नेता बनाने में रक्षा वैज्ञानिकों की बड़ी भूमिका होगी।





यहां डीआरडीओ के निदेशकों के 41वें सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में शोध एवं समाघात श्रेष्ठता बनाए रखना वक्त की मांग है। उन्होंने कहा कि दुनिय़ा तेजी से बदल रही है औऱ अतिउन्नत और क्रांतिकारी तकनीक का तेजी से विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक का विकास समुचित लागत और कम वक्त में होना चाहिये। शोध एवं विकास में तकनीकी खाई को पाटने के लिये वैज्ञानिकों से आह्वान करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वे ऐसी तकनीक के विकास पर ध्यान दें जो अगले एक-डेढ़ दशक तक उपयोगी साबित हो।

रक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीक के विकास में कुछ सीमाएं होती हैं औऱ उत्पादों के विकास में कुछ वक्त लगता है। ऐसा भी होता है कि जटिल तकनीक विकास के क्रम में नई तकनीक उभरती है इसलिये इस तरह के विकास में क्रमिक विकास को प्राथमिकता देनी होगी। डीआरडीओ और सभी हितधारकों के बीच गहन तालमेल बनाने का सुझाव देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा तकनीक में श्रेष्ठता हासिल करने के लिये डीआरडीओ को एक कार्योजना तैयार करने का सुझाव दिया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि कड़े प्रयासों से भारत रक्षा तकनीक में नेता बन सकता है जिसके बहुआयामी फायदे हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया, निवेश सुविधा, कौशल विकास, बौद्धिक सम्पदा संरक्षण और निर्माण ढांचा आदि विशेष पहलों से भारत को रक्षा उत्पादन में विश्व नेता बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ने का संकल्प रक्षा मंत्री ने जाहिर किया। उन्होंने भरोसा जाहिर किया कि विश्व स्तर की हथियार प्रणालियों, लड़ाकू वाहनों, इलेक्ट्रानिक युद्ध प्रणालियों, प्रोपेलेंट और विस्फाटकों के स्वदेशी उत्पादन से भारत रक्षा क्षेत्र में आत्म निर्भर होगा।

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