DEFENCE

खास रिपोर्ट: भारत-रूस के बीच 10 साल और बढ़ेगा रक्षा सहयोग समझौता 

राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी
प्रतीकात्मक

नई दिल्ली। भारत औऱ रूस आपसी रक्षा सहयोग को जारी रखने औऱ इसे औऱ गहराई  देने के लिये आपसी सैन्य औऱ तकनीकी सहयोग के समझौते को दस साल के लिये और विस्तार देंगे। यह विस्तार 2021 से 2030 की अवधि के लिये होगा।





यहां रूसी दूतावास में आला राजनयिक रोमान बाबुशकिन ने यह जानकारी दी। बाबुशकिन के मुताबिक यह समझौता अगले एक दशक के लिये सम्पन्न होगा। इस समझौते में भारतीय सेनाओं द्वारा इस्तेमाल किये जा रहे रूसी सैन्य साज सामान के  समुचित रखरखाव के लिये स्पेयरा पार्ट्स की सप्लाई औऱ भारत में इसके उत्पादन का प्रावधान भी होगा।  इसके तहत शस्त्र प्रणालियों के संयुक्त विकास , डिजाइन औऱ उत्पादन के कार्यक्रम भी शामिल होंगे।

रूस सैन्य क्षेत्र में भारत का सबसे भरोसेमंद साझेदार रहा है। भारतीय सेनाओं में फिलहाल 60 प्रतिशत  से अधिक सैन्य साज सामान रूसी मूल के हैं। रूस के साथ सैन्य औऱ रक्षा सहयोग के खिलाफ  औऱ इसे कम करने के अमेरिकी दबावों  के बीच रूस औऱ भारत के बीच आपसी सैन्य सहयोग समझौता एक दशक के लिये जारी रखना काफी अहम है। बाबुशकिन ने कहा कि भारत  और रूस के बीच होने वाले साझा सैन्य अभ्यासों से वह संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि 2011 से 2020 तक  के लिये  दोनों देशों के बीच  सम्पन्न लांग टर्ण प्रोग्राम फार मिलिट्री एंड टेक्नीकल  कोआपरेशन के सफलतापूर्व लागू होने का वह स्वागत करते हैं।

सामरिक साझेदारी की इसी भावना के अनुरूप रूस द्वारा भारत को सप्लाई की  जाने वाली एस-400 एंटी मिसाइल प्रणाली के लिये भुगतान रूपये में किया जा रहा है। भारत ने रूस से सवा पांच अरब डालर की लागत से पांच एस-400 मिसाइल प्रणालियों को खरीदने का सौदा किया है। गौरतलब है कि अमेरिका ने भारत को धमकी दी थी कि रूस से इन मिसाइल प्रणालियों को खरीदा तो भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना होगा।

रूसी राजनयिक ने सवालों के जवाब में बताया कि पांचों एस-400 एंटी मिसाइलें भारत को साल 2023 तक सप्लाई हो जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक  भारत रूस से दूसरी परमाणु पनडुब्बी हासिल करने पर भी बात कर रहा है।

 

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