DEFENCE

Special Report: भारत का इमरान खान को संयमित जवाब

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार

नई दिल्ली। पुलवामा में 14 फरवरी को आतंकवादी हमले के बाद भारत में फैले राष्ट्रव्यापी गुस्सा और पाकिस्तान को सबक सिखाने की चेतावनी के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री  इमरान खान द्वारा मंगलवार को पाकिस्तान पर हमला करने की चुनौती दिये जाने वाले बयान का भारत ने संयमित जवाब दिया है।





भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के बयान पर खेद जाहिर करते हुए कहा है कि उन्हें इस बात पर कोई हैरानी नहीं हुई है कि पुलवामा में सुरक्षा  बलों पर हुए हमले को आतंकवादी हमला मानने से इनकार किया है और न ही इस घृणित कार्रवाई की निंदा की है और न ही शोकग्रस्त परिवारों से अपनी संवेदनाएं जाहिर की है।

प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने वार्ता की पेशकश की है और आतंकवाद के मसले पर बात करने की इच्छा जाहिर की है। भारत ने बार बार कहा है कि वह आतंक और हिंसा से मुक्त माहौल में ही समग्र वार्ता करने को तैयार होगा। प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान दावा करता है कि वह खुद आतंकवाद का शिकार है जो कि सचाई से कोसों दूर है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह अच्छी तरह पता है कि वह आतंकवाद का गढ़ बना हुआ है। प्रवक्ता ने कहा कि यह जगजाहिर सचाई है कि जैश-ए-मोहम्मद का नेता मसूद अजहर पाकिस्तान में रहता है। इसके खिलाफ समुचित कार्रवाई करने के लिये पाकिस्तान के पास काफी सबूत मिलेंगे।

प्रवक्ता ने इमरान खान के इस कथन पर खेद जाहिर किया कि पुलवामा हमले पर आतंकवादी हमले का जवाब भारत में आगामी चुनावों के मद्देनजर तय होगा। प्रवक्ता ने कहा कि वह पाकिस्तान से मांग करते हैं कि आतंकवाद के मसले पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह न करे।  प्रवक्ता ने मांग की कि वह पुलवामा हमला करवाने वालों के खिलाफ भरोसेमंद कार्रवाई करे।

प्रवक्ता ने कहा कि इमरान खान ने भारत द्वरा सबूत पेश किये जाने के बाद वह हमले की जांच में सहयोग करेगा लेकिन यह एक बहाना मात्र है। प्रवक्ता ने इमरान खान को याद दिलाया कि 11 साल पहले मुम्बई पर 26/11 के आतंकवादी हमले के सारे सबूत दिये गए, पठानकोट हमले के सबूत भी पाकिस्तान को दिखाए गए लेकिन पाकिस्तान ने कोई कार्रवाई नहीं की।

प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री खान एक नया पाकिस्तान बनाने की बात करते हैं लेकिन मौजूदा सरकार के मंत्री आतंकवादी संगठनों औऱ इनके नेताओं के साथ जिस तरह मंच साझा करते हैं उनसे यह नहीं लगता कि  वह नया पाकिस्तान बनाने के लिये गम्भीर हैं।

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