DEFENCE

Special Report: भारतीय थलसेना को स्वदेशी ‘धनुष तोप’ सौपेगी आर्डनेंस फैक्टरी

स्वदेशी 'धनुष' तोप
फाइल फोटो

नई दिल्ली।  भारतीय थलसेना को करीब तीन दशक बाद  होवित्जर तोपें सौंपी जाएंगी। साल 1988 में स्वीडन से आयातित बोफोर्स होवित्जर तोपों का सौदा दलाली के आरोपो में उलझ जाने के बाद भारतीय थलसेना को होवित्जर तोपों की आगे की सप्लाई रुक गई थी।





अब पहली बार पूरी तरह देश में बनी 155 मिमी गुना 45 कैलिबर की धनुष आर्टीलरी गन जबलपुर की गन कैरिज फैक्टरी, जबलपुर को सौंपी जाएंगी। धनुष नाम की इस तोप के पहले बैच को आर्डनेंस  फैक्टरी बोर्ड के चैयरमैन सेन्ट्रल आर्डेनेंस डिपो, जबलपुर को सौंपेंगे। थलसेना ने ऐसी 114 धनुष तोपों को बनाने का आर्डर दिया था।

गौरतलब है कि 155 मिमी की आर्टीलरी तोपें दुश्मन के इलाके में  30 से 40 किलोमीटर दूर तक गोले फेंक सकती हैं। वर्ष 1999 में करगिल युद्ध के दौरान ऐसी तोपों की भारी कमी महसूस हुई थी।  लेकिन  दलाली के आरोपों की वजह से आगे के सौदों  में कई जटिलताएं पैदा हुईं जिससे नई तोपों का सौदा नहीं हो सका। इस बीच भारत की आर्डनेंस डिपो ने अपनी क्षमता के बल पर 155 मिमी की तोपो का डिजाइन व विकास किया औऱ इनका सफलतापूर्वक उत्पादन भी शुरू कर दिया।

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