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स्पेशल रिपोर्ट: भारत ने अंतरिक्ष में सेटेलाइट को मार गिराया

पीएम मोदी

नई दिल्ली। पृथ्वी की निचली कक्षा में करीब 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक उपग्रह को मिसाइल से नष्ट करने की क्षमता दिखाकर भारत ने सामरिक दुनिया में सनसनी पैदा कर दी है। मिशन- शक्ति के तहत अंतरिक्ष में उपग्रह को नष्ट करने वाली क्षमता दिखाने के लिये एंटी सेटेलाइट मिसाइल को सफलतापूर्वक छोड़ने का ऐलान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद राष्ट्र के नाम एक संदेश देकर किया।





इस एंटी सेटेलाइट मिसाइल का परीक्षण रक्षा शोध एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा किया गया। इसके लिये  डीआरडीओ ने अपने द्वारा विकसित बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किया।

भारत इस तरह अंतरिक्ष में उपग्रहों को नष्ट करने की क्षमता दिखाने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है। इसके पहले अमेरिका, रूस औऱ चीन ने अंतरिक्ष में उपग्रहों को नष्ट करने की क्षमता दिखाई थी। चीन ने पहली बार 2007 में  करीब 866 किलोमीटर की ऊंचाई पर ध्रुवीय कक्षा में अपने एक निष्क्रिय उपग्रह को निशाना बना कर यह क्षमता दिखाई थी। इसके बाद दुनिया भऱ में चीन की काफी भर्त्सना की गई थी।

लेकिन भारत ने कहा है कि यह परीक्षण कर  किसी अंतरिक्ष संधि का उल्लंघन नहीं किया है। भारत ने कहा है कि हमने केवल अपनी क्षमता दिखाई है ताकि उन ताकतों में खौफ पैदा हो जो अंतरिक्ष में भारत के संसाधनों को नष्ट करने की सोच रहे हों। भारत ने कहा है कि हमने हमेशा कहा है कि अंतरिक्ष का इस्तेमाल शांतिपूर्ण इऱादों के लिये ही किया जाना चाहिये। हम बाहरी अंतरिक्ष के सशस्त्रीकरण के खिलाफ हैं। हम अंतरिक्ष आधारित संसाधऩों की सुरक्षा के लिये अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करते हैं।

भारत का मानना है कि बाहरी अंतरिक्ष मानव समुदाय की साझा धरोहर है और अंतरिक्ष कार्यक्रम चलाने वाले सभी देशों की यह जिम्मेदारी है कि उनके अंतरिक्ष कार्यक्रमों से मिलने वाले लाभों को दूसरे देशों के साथ साझा करें।

भारत ने कहा है कि यह परीक्षण पृथ्वी की निचली कक्षा में यह सुनिश्चित करने के लिये किया गया कि अंतरिक्ष में कोई कचरा  नहीं जमा हो। भारत ने यह परीक्षण अंतरिक्ष में अपने संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये किया।

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