DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: भारत-जर्मनी के बीच और गहरा होगा रक्षा सहयोग

पीएम मोदी और जर्मन चांसलर मर्केल
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। भारत और जर्मनी ने रक्षा और रक्षा उद्योग क्षेत्र में आपसी सहयोग को औऱ गहरा करने के लिये एक नये समझौते पर दस्तखत किये हैं। भारतीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के जर्मनी के दो दिनों के दौरे में जर्मन रक्षा मंत्री डॉ. उर्सुला वानडर लेयेन के साथ बातचीत के बाद नये सहयोग समझौते पर दस्तखत किये गए।





इस दौरे में दोनों रक्षा मंत्रियों ने आपसी रक्षा सहयोग की गहन समीक्षा की। यहां इस बारे में रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि भारत-जर्मनी सामरिक  साझेदारी में रक्षा सहयोग अहम भूमिका निभा रहा है। इस समझौते से दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और तालमेल बढ़ेगा और दोनों देशों के रक्षा और शोध उद्योगों के बीच भी आपसी मेलजोल और सहयोग बढ़ाने की नींव रखी गई है। प्रवक्ता ने बताया कि दोनों रक्षा मंत्रियों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मसलों पर भी विचारों का आदान प्रदान किया।

रक्षा मंत्री सीतारमण ने जर्मनी की अग्रणी विचार संस्था डीजीएपी को भी सम्बोघित किया औऱ एक अव्यवस्थित दुनिया में भारत के रक्षा तालमेल, प्राथमिकताओं और सिद्धातों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और स्थिर माहौल विकसित करना है। रक्षा मंत्री ने कहा कि समान विचार वाले जनतांत्रिक देशों को समान मूल्यों और हितों के अनुरूप साझा सामरिक आकलन करने के लिये तालमेल बढ़ाना चाहिये।

अपने दौरे में रक्षा मंत्री ने जर्मन और भारतीय रक्षा उद्योग के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की एक साझा बैठक को भी सम्बोधित किया। उन्होंने जर्मन उद्योग से भारत के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम में भी साझेदारी करने को प्रेरित किया।

गौरतलब है कि जर्मनी ने नब्बे के दशक के शुरू में भारत को एचडीडब्ल्यू पनडुब्बियों की सप्लाई की थी लेकिन दलाली के आरोपों के बाद यह सहयोग जारी नहीं रह सका। बाद में जर्मनी ने चार देशों के यूरोपियन फाइटर विमान भारत को बेचने के लिये भी गहरी रुचि ली लेकिन यह कामयाब नहीं हो सका।

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