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स्पेशल रिपोर्ट: भारत-चीन अब समुद्री वार्ता बहाल करेंगे

मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिन फिंग

नई दिल्ली। चीन के वूहान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिन फिंग की अनौपचारिक शिखर बैठक के बाद विभिन्न क्षेत्रों में दिवपक्षीय रिश्तों में बेहतर तालमेल और सुधार देखने को मिलेंगे। जहां इन दिनों सुकना में भारत और चीन के क्षेत्रीय सैन्य कमांडरों की बैठक चल रही है वहीं दोनों देश समुद्री क्षेत्र में भी आपसी विश्वास बढ़ाने के लिये समुद्री वार्ता को बहाल करेंगे।





यह समुद्री वार्ता रूस के साथ भी होगी। भारत इसके पहले फ्रांस और इंडोनेशिया के साथ समुद्री वार्ता कर चुका है। चीन और रूस के साथ समुद्री वार्ता का फैसला करने की जानकारी यहां एक उच्चस्तरीय राजनयिक सूत्र ने दी।

समुद्री क्षेत्र में भारत और चीन को एक दूसरे के इरादों को लेकर शंका पैदा हुई है। जहां हिंद महासागर में चीनी पनडुब्बियों और युद्धपोतों के विचरण पर भारत में चिंता जाहिर की जा रही है वहीं दक्षिण चीन सागर में चीन के रुख को लेकर भारत ने आगाह किया है कि वह नियम आधारित समुद्री कानूनों का पालन करे।

भारत और चीन के बीच समुद्री वार्ता का दौर  तीन साल पहले शुरु हुआ था लेकिन यह जारी नहीं रह सका। अब दोनों देशों के शिखर नेताओं के बीच अनौपचारिक शिखर बैठक के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में परस्पर विश्वास का माहौल बनाने पर सहमति बनी है। इसी के तहत भारत और चीन समुद्री वार्ता बहाल करने पर राजी हुए हैं।

यहां सामरिक हलकों में माना जा रहा है कि फिर से बहाल की गई समुद्री वार्ता में हिंद प्रशांत के चर्तुपक्षीय गुट के इरादों को लेकर चीन सवाल उठा सकता है। भारत द्वारा हिंद प्रशांत समूह के चार देशों की अनौपचारिक बैठक करने और एक चर्तुपक्षीय गुट के उभरने को लेकर चीन शंकित है। हालांकि भारत ने साफ किया है कि यह चर्तुपक्षीय गुट किसी देश के खिलाफ निर्देशित नहीं है और हिंद प्रशांत के सागरीय इलाके में देशों के बीच सहयोग का माहौल बनाने की एक कोशिश है।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक कुछ साल पहले तक भारत और चीन की नौसेनाओं के बीच तालमेल और आदान-प्रदान काफी गहरा होने लगा था जिसे फिर बहाल करने की जरूरत महसूस की जा रही है। खासकर डोकलाम में दोनों देशों के बीच चली सैन्य तनातनी के बाद नौसैनिक स्तर पर भी आदान-प्रदान रुका हुआ है। एक दशक पहले दोनों देशों के युद्धपोत एक दूसरे के सैन्य अड्डों पर जा कर पैसेज अभ्यास भी करते थे। लेकिन यह सिलसिला रुक गया।

आर्थिक क्षेत्र में जहां चीन ने भारत से व्यापार असंतुलन दूर करने के लिये कुछ कदम घोषित किये हैं वहीं भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक आफ चाइना को पहली बार भारत में शाखा खोलने का लाइसेंस जारी कर दिया है।

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