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स्पेशल रिपोर्ट: अंतरिक्ष में भारत ने नई ताकत हासिल की

ध्रुवीय यान (PSLV C- 45)

नई दिल्ली। अंतरिक्ष में भारत ने नई ताकत हासिल की है। छह दिनों पहले अंतरिक्ष में घूम रहे किसी सैन्य या खुफिया उपग्रह को मार गिराने की क्षमता हासिल करने के बाद भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने एक इलेक्ट्रानिक खुफिया उपग्रह स्थापित कर  भारतीय सेनाओं को एक नई क्षमता प्रदान की है।





 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने सोमवार को अपने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान( पीएसएलवी) के जरिये  एमिसैट( EMISAT)  नाम का एक ऐसा उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा जो दुश्मन के रेडार और संचार स्थलों  को देख कर उन्हें नष्ट करने में मदद कर सकता है। इसरो ने एमिसैट नाम के इस उपग्रह के साथ अपने राकेट पर 28 अन्य छोटे उपग्रह भी विभिन्न देशों के छोड़े हैं।

 इस ध्रुवीय यान (PSLV C- 45) के जरिये ने एक नये टोही उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित कर  भारत ने दुनिया को एक बार फिर संदेश दिया है कि वह अंतरिक्ष की एक बड़ी ताकत बन चुका है।

 रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख डा.जी सतीश रेड्डी ने इस कामयाबी पर अपनी टिप्पणी में कहा कि अंतरिक्ष में दोहरी ताकत हासिल करने से उन्हें काफी खुशी हुई है। पहले भारत ने पृथ्वी की निचली कक्षा में 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक एंटी सैटेलाइट प्रणाली के जरिये अपने एक उपग्रह को नष्ट करने की क्षमता मिशन- शक्ति के जरिये दिखाई और अब भारत ने अंतरिक्ष मे  अपने नये उपग्रह के जरिये जमीन पर स्थित किसी रेडार को  पहचान कर उसे नष्ट करने की क्षमता हासिल कर ली है।

पीएसएलवी की 47 वीं उड़ान की उलटी गिनती रविवार को सुबह 6:37 पर शुरु हुई थी। दुश्मन के रेडारों का पता लगाने के लिये भारत अब तक अपने विमानों का इस्तेमाल कर रहा था लेकिन अब अंतरिक्ष में अपने टोही उपग्रह भेजकर भारत ने दुश्मन के इलाके में काफी भीतर झांक कर देखने की क्षमता हासिल कर ली है।

  पीएसएलवी के जरिये इसरो ने पृथ्वी की तीन कक्षाओं में उपग्रह छोड़ने की क्षमता भी दुनिया को दिखाई है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह भारत ने जो एंटी सेटेलाइट छोड़ा था उसके मलवे के बीच से होकर भारत का ताजा एमिसैट उपग्रह अंतरिक्ष में गया है। इससे पता चलता है कि पिछले महीने गिराए गए उपग्रह का मलवा किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा रहा है।

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