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स्पेशल रिपोर्ट: भारतीय सीमाओं का लिखा जाएगा इतिहास

चीनी सैनिक
फाइल फोटो

नई दिल्ली। भारत की सीमाओं का इतिहास लिखने की योजना को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंजूरी दी है। गौरतलब है कि भारत की 14 हजार किलोमीटर लम्बी सीमा है जो बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, चीन, म्यांमार और पाकिस्तान से लगी हैं। इतिहास के विभिन्न दौर  में ये सीमाएं  नए सिरे से खींची जाती रही हैं।





इस बारे में रक्षा मंत्री ने सभी सम्बद्ध विभागों के आला अधिकारियों के साथ एक बैठक की है।  इसमें ऐतिहासिक शोध के लिये भारतीय परिषद (आईसीएचआर ) के अलावा  गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय , रक्षा मंत्रालय,  नेहरू मेमोरियल म्यूजियम,  पुरातत्व महानिदेशालय के आला अधिकारिय़ों ने भाग लिया।

इस शोध कार्य में सीमाओं के विभिन्न पहलुओं पर  संदर्भ सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा औऱ उनका  विवरण तैयार किया जाएगा।  इसमें सीमाओं का निर्धारण, सीमाओं के बनने औऱ टूटने, सुरक्षा बलों की भूमिका, सीमांत लोगों का इतिहास औऱ उनकी सामुदायिक पहचान, उनके जीवन के सांस्कृतिक और सामाजिक पहलुओं का विस्तार से वर्णन होगा।

उम्मीद की जा रही है कि यह परियोजना दो साल के भीतर पूरी हो जाएगी। बैठक में रक्षा मंत्री ने भारतीय सीमाओं के इतिहास को लिखने की अहमियत बताई।  इससे सीमावासियों के बारे में बेहतर समझ पैदा होगी। बैठक में दिये गए विभिन्न सुझावों का रक्षा मंत्री ने स्वागत किया।

यहां रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि देश में इस तरह की पहली परियोजना पर काम शुरु करने को हरी झंडी दी गई है।

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