DEFENCE

Special Report: पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा- परमाणु हथियारों का इस्तेमाल रोकना बड़ी चुनौती

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने सबसे बड़ी चुनौती है 1945 के बाद परमाणु बमों के इस्तेमाल पर लगी रोक  कैसे जारी रखी जाए। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यहां परमाणु व्यवस्था पर एक पुस्तक का विमोचन करते हुए यह टिप्पणी की।





गौरतलब है कि 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा औऱ नागासाकी शहरों पर परमाणु बम गिराए थे। इनकी भयंकर विनाशलीला को लोग आज भी दहशत से याद करते हैं। इस परमाणु विनाशलीला के बाद  दुनिया में परमाणु बमों का  उत्पादन तो काफी तेज हो गया और दुनिया में एक बहुत बड़ा परमाणु भंडार खड़ा हो गया लेकिन इसे लेकर एक तरह का संतुलन परमाणु ताकतों के बीच बना रहा। पर इसके इस्तेमाल को लेकर सभी एक बात से सहमत हैं कि यदि एक पक्ष ने भी इसका इस्तेमाल किया तो इसका जवाबी इस्तेमाल होगा और पृथ्वी का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो जाएगा।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह विचार संस्था आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित- 21 वीं सदी में परमाणु व्यवस्था- एक पुस्तक के विमोचन के अवसर पर कहा कि  शीतयुद्ध के दौरान परमाणु हथियारों को लेकर एक संतुलन बना हुआ था लेकिन आज की दुनिया में भारी असंतलुन पैदा हो गया है।

यह पुस्तक निरस्त्रीकरण पर प्रधानमंत्री के पूर्व  दूत राकेश सूद ने सम्पादित की है जिसमें दुनिया के अग्रणी सामरिक विशेषज्ञो के निबंध प्रकाशित हुए हैं।

 मनमोहन सिंह ने कहा कि इस पुस्तक  का प्रकाशन इससे बेहतर मौके पर नहीं हो सकता था क्योंकि एक बार फिर दुनिया परमाणु अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है।  उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में परमाणु व्यवस्था पर तनाव बढ़ गया है। कुछ पुराने शस्त्र समझौते टूटने लगे हैं और कुछ देश अपने परमाणु भंडारों का आधुनिकीकरण करने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि दुनिया में एक बार फिर राष्ट्रवाद, उग्रवाद और आतंकवाद अपने पांव पसार रहा है इसलिये परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर सामरिक चिंतकों की चिंता बढ़ गई है।

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