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खास रिपोर्ट: चीनी लड़ाकू ड्रोनों का निर्यात तेजी से बढ़ा

चीनी लड़ाकू ड्रोन

नई दिल्ली। पायलट रहित लडाकू विमान यानी कम्बैट ड्रोन के उत्पादन में चीन तेजी से आगे बढ़ रहा है। चीन द्वारा बनाए गए कम्बैट ड्रोन यानी अनमैन्ड कम्बैट एरियल वेहीकल (UCAV)  खासकर अरब मुल्कों में काफी लोकप्रिय हो रहे हैं।  चीन द्वारा बनाए गए विंग लोंग- II कम्बैट ड्रोन की खासकर इन देशों में मांग पैदा हुई है। यह ड्रोन दुश्मन के इलाके में किसी ठिकाने को अपनी मिसाइलों से निशाना बना सकता है।





स्टाकहाम स्थित अंतरराष्ट्रीय शांति अध्ययन संस्थान (सिपरी) के एक ताजा अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि चीन ने 2014 से 2018 के बीच 13 देशों को 153 कम्बैट ड्रोनों का निर्यात किया है। ये देश हैं- इजिप्ट, इराक, जार्डन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात। साल 2009 से 2013 के तुलना में चीन ने 2014-18 के बीच पायलट रहित लड़ाकू विमानों के निर्यात में 14 गुना की बढ़ोतरी हासिल की है।

गौरतलब है कि भारत में भी रक्षा शोध एवं विकास संगठन द्वारा कम्बैट ड्रोन के डिजाइन और विकास व उत्पादन के लिये पिछले कई सालों से काम चल रहा है लेकिन भारत यह क्षमता हासिल करने से अभी कोसों दूर है। कम्बैट ड्रोन के जरिये दुश्मन के इलाके में हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों को भी दागा जा सकता है। ये ड्रोन दुश्मन के खास ठिकानों को राकेट हमलों से भी तबाह कर सकते है। यदि ये ड्रोन दुश्मन की हवाई रक्षा प्रणाली द्वारा मार गिराए गए तो इनसे किसी पायलट को दुश्मन के इलाके में गिरने का खतरा भी नहीं रहेगा।

सिपरी के मुताबिक चीन के हथियार आयातकों में पाकिस्तान और बांग्लादेश प्रमुख देश हैं। पाकिस्तान अपनी जरूरत का 37 प्रतिशत हथियार चीन से आयात करता है जब कि बांग्लादेश 16 प्रतिशत हथियार आयात करता है।

वर्ष 2014 से  2018 के बीच चीन ने 12 नये देशों को हथियारों की सप्लाई शुरू की है। चीन इस तरह दुनिया के 53 देशों को हथियारों का निर्यात करने लगा है।

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