DEFENCE

Special Report: एंटी मिसाइलों की कामयाबी पर शक

एंटी मिसाइल सिस्टम
फाइल फोटो

नई दिल्ली। दुश्मन की मिसाइलों और हमलावर विमानों को मार गिराने का दावा करने वाली एंटी मिसाइल प्रणालियां हाल में दो  जगहों पर फेल हो गई हैं। इससे इन मिसाइल नाशक प्रणालियों की उपयोगिता पर सवाल खड़े  होने लगे हैं।





पिछले सप्ताह सऊदी अरब के पेट्रोल संयंत्रों पर यमन की ओर से जब ड्रोन हमला हुआ तो वहां तैनात अमेरिका की पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली को पता ही नहीं चला कि इसके इलाके में कोई हमलावर हवाई प्रणाली घुस चुकी है। यमन से भेजे गए ड्रोनों ने सऊदी अरब के तेल ठिकानों को पूरी तरह जला दिया।

इसी तरह पिछले सप्ताह ही सीरिया में जब इजराइल के  एफ-35  लड़ाकू विमानों  ने सीरिया के ठिकानों पर हमले किये तो वहां तैनात रूसी एस- 300 और एस- 400 एंटी मिसाइल प्रणालियां उन्हें नहीं देख सकीं। सीरिया में भी इसराइली विमान हमला कर लौटने में कामयाब हो गए।

 इस तरह यमन और सीरिया दोनों जगहों पर तैनात एंटी मिसाइल प्रणालियों की नाकामयाबी पर सामरिक हलकों में सवाल उठाए जाने लगे हैं। ये मिसाइल प्रणालियां अरबों डालर की लागत वाली होती हैं और  इनके रखरखाव पर भी करोड़ों डालर सालाना का खर्च आता है।

सामरिक हलकों में इसलिये सवाल उठाए जा रहे हैं कि एंटी मिसाइल प्रणालियां शत प्रतिशत दुश्मन के मिसाइली हमलों से बचाव की गारंटी नहीं देती हैं।

गौरतलब है कि भारत ने भी अपनी स्वदेशी एंटी मिसाइल प्रणाली का विकास किया है लेकिन उन पर पूरा भरोसा सेनाओं को नहीं होने की वजह से भारत को रूस से एस- 400 एंटी मिसाइल प्रणालियों का सोदा करना पड़ा है। ये मिसाइल प्रणालियां साल 2023 तक भारत के प्रमुख शहरों की रक्षा के लिये तैनात हो जाएंगी।

 भारत ने ऐसी पांच एंटी मिसाइल प्रणालियां सवा पांच अरब डालर की लागत से खरीने का सौदा रूस के साथ किया है।

सैन्य पर्यवेक्षकों का कहाना है कि एंटी मिसाइल प्रणालियां शत प्रतिशत रक्षा की गारंटी नहीं दे सकतीं। दुश्मन के एक दजर्न से अधिक लड़ाकू विमान यदि भारतीय इलाके में घुस जाएं तो उनमें से एक-दो भारतीय इलाके में घुसने में कामयाब हो सकते हैं। इस  तरह वे दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणाली को तैनात करने के उद्देश्यों को बेमानी साबित कर सकते हैं।

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