DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: अमेरिकी चेतावनी के बावजूद रूस से नई मिसाइलों पर बात

एस- 400 डिफेंस सिस्टम
फाइल फोटो

नई दिल्ली। रूस से नई शस्त्र प्रणालियां नहीं खरीदने के अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत रूस से नई किस्मों की मिसाइलों को हासिल करने पर बातचीत कर रहा है। ये मिसाइलें सुखोई-30 एमकेआई और मिग-29 के  लड़ाकू विमानों पर तैनात की जाएंगी।





गौरतलब है कि अमेरिका ने  घरेलू कानून कैटसा( काउंटरिंग अमेरिकन एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट) यानी अमेरिका के प्रतिद्वंदी देशों का मुकाबला करने के लिये प्रतिबंध कानून  पारित करने के बाद उन सभी देशों को चेतावनी दी है कि यदि रूस से कोई सैनिक साज सामान खरीदा तो खरीदार देश पर अमेरिकी प्रतिबंध लग जाएंगे। कैटसा कानून के तहत ही अमेरिका ने तुर्की से कहा है कि वह रूस से एस-400 एंटी मिसाइल प्रणाली नहीं खरीदे और अब उसने भारत से दोबारा कहा है कि रूस से एस-400 एंटी मिसाइल प्रणाली नहीं खरीदे।

गौरतलब है कि अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के 24 जून को भारत आने के पहले अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने भारत को चेताया है कि वह रूस से एस-400 एंटी मिसाइल नहीं खरीदे। भारत ने कहा है कि इस रूसी मिसाइल के लिये सौदा सम्पन्न हो चुका है और इसके तहत जरूरी कदम उठाए जाने लगे हैं। इसलिये भारत इस सौदे को रद्द नहीं कर सकता।

अमेरिका की इस चेतावनी के बावजूद भारत ने अपने रूसी मूल के सुखोई- 30 और मिग- 29के लड़ाकू विमानों पर हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाली नई मिसाइलें खरीदने की बात चलाई है। इस सौदे पर करीब 70 करोड़ डॉलर का खर्च हो सकता है। इस नई सौदेबाजी के तहत भारतीय वायुसेना के लिये आर-73 शार्ट रेंज हवा से हवा में मार करने वाली तीन सौ मिसाइलें , आर-77 मीडियम रेंज की हवा से हवा में  मार करने वाली 400  मिसाइलें और एक्स-31  रेडार जैम करने वाली मिसाइलें शामिल हैं।

 इन मिसाइलों का आर्डर मिलने के बाद रूस ने भारत को लम्बी दूरी की नई मिसाइलें सप्लाई करने की पेशकश की है। रुसी समाचार एजेंसी स्पुतनिक के मुताबिक रूस की वार्ता टीम भारतीय अधिकारियों के साथ इनकी सप्लाई पर बात कर रही है। एक आधिकारिक सूत्र ने कहा कि दोनों देश जल्द ही इस नई मिसाइल का सौदा कर लेंगे। इसके अलावा भारतीय थलसेना के लिये रूस से  हवाई रक्षा प्रणालियों के लिये लांचर और मिसाइलों की मांग भी की गई  है।

गौरतलब है कि गत मार्च महीने में रूस ने भारतीय सेनाओं के लिये रूसी मिसाइल निर्माता विम्पेल ने आरवीवी- एमडी शार्ट रेंज मिसाइल, आरवीवी – एसडी मीडियम रेंज मिसाइल और आरवी-बीडी लांग रेंज मिसाइलों की पेशकश की थी।

 यहां रक्षा पर्यवेक्षकों का कहना है कि   अमेरिका रूस से भारत के रक्षा सम्बन्धों को सीमित कर अपने रक्षा उद्योग का   भारत पर आधिपत्य जमाना  चाहता है। भारत में अगले एक दशक के भीतर एक सौ अरब डालर से अधिक के रक्षा साज सामान खरीदे जाएंगे। अमेरिका चाहता है कि भारत को रूस से दूर कर भारत के रक्षा बाजार पर पूरा कब्जा  हो।

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