DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: 80 हजार करोड़ के रक्षा सामान का पिछले साल हुआ देश में उत्पादन

धनुष तोप

नई दिल्ली। पिछले वित्तीय साल में भारतीय रक्षा उद्योग ने 80 हजार करोड़ रुपये मूल्य के सैन्य साज सामान का उत्पादन किया। इसमें प्राइवेट रक्षा उद्योग का योगदान 16 हजार करोड़ रुपये का था।  देश की अग्रणी रक्षा और अंतरिक्ष वैमानिकी कम्पनियों के आला अधिकारियों की एक बैठक को सम्बोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को और उदार बना दिया गया है।





रक्षा मंत्री ने कहा कि  सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों औऱ आय़ुध कारखानों को बढ़ावा दे कर उन्हें मजबूत करते रहने के साथ ही वह रक्षा उद्योग में प्राइवेट कम्पनियों की भागीदारी को बढ़ावा देंगे।

उन्होंने कहा कि घरेलू रक्षा बाजार में योगदान देने के साथ ही प्राइवेट रक्षा कम्पनिया निर्यात में योगदान दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि देश में रक्षा निर्माण का ढांचा खड़ा करने के लिये सामरिक साझेदारी के माडल को जारी कर दिया गया है। इसके जरिये भारतीय कम्पनियां विदेशी कम्पनियों को अपना भागीदार बना सकती हैं। इसके लिये पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई गई है।

आफसेट प्रोसेसिंग के बारे में रक्षा मंत्री ने कहा कि इसके लिये आफसेट प्रोसेसिंग पोर्टल स्थापित किया गया है जिसके जरिये 1.5 अरब डालर के  निवेश के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। रक्षा क्षेत्र में छोटे और मझोले उद्योगों को प्रवेश की  बाधाएं कम कर दी गई हैं जिससे 2019 में 440 कम्पनियों को लाइसेंस दिये जा चुके हैं जब कि 2014 में 215 लाइसेंस जारी किये गए थे।

रक्षा मंत्री ने बताया कि रक्षा मंत्रालय में एक साल पहले स्थापित डिफेंस इनवेस्टर सेल ने 550 सवालों के जवाब दिये है। रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने की सरकार की नीति के बारे में रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने इसके लिये कई कदम उठाए हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता तब तक मुमकिन नहीं हो सकेगी जबतक कि स्वदेशी रक्षा तकनीक का विकास नहीं  किया जाए। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ के सपने को साकार करने के लिये बहुआयामी रुख अपनाना होगा।

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