DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: अगले 5 साल में रक्षा निर्यात 5 अरब डॉलर का होगा

एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल
फाइल फोटो

नई दिल्ली। भारतीय रक्षा मंत्रालय को उम्मीद है कि अगले पांच सालों के भीतर भारत से रक्षा निर्यात पांच अरब डॉलर का हो सकता है। यहां वाणिज्य संगठन फिक्की की एक बैठक को सम्बोधित करते हुए रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव संजय जाजू ने यह उम्मीद जाहिर करते हुए कहा कि अगले पांच सालों के भीतर भारत की निर्माण अर्थव्यवस्था एक ट्रिलियन डॉलर होने की उम्मीद है और इसमें रक्षा निर्यात का हिस्सा पांच अरब डॉलर तक का हो सकता है।





रक्षा मंत्रालय के तहत रक्षा उत्पादन विभाग के संयुक्त सचिव जाजू ने फिक्की द्वारा रक्षा निर्यात संवर्द्धन पर आयोजित एक गोष्टी में कहा कि भारत से रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिये सरकार एक महीने के भीतर ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस की योजना जारी करेगी। जाजू ने कहा कि इस योजना के तहत रक्षा साज सामान के निर्यात के लिये सरकार से अनुमति लेने की प्रक्रियाओं में कटौती होगी।

जाजू ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी बनने के लिये भारतीय रक्षा निर्यातकों को अपने उत्पादों का आधार बढ़ाना होगा। हमारे लिये यह महत्वपूर्ण है कि हम प्लेटफॉर्मों को देखें और यह भी अहम है कि हम प्रतिस्पर्धी बनें और खरीदारों को अच्छे उत्पाद पेश करें।

रक्षा मंत्रालय में नौसेना के क्वालिटी एस्योरेंस के अतिरिक्त महानिदेशक रियर एडमिरल अतुल खन्ना ने कहा कि भारतीय रक्षा उद्योंग फिलहाल भारी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। मांग तेजी से बढ़ती जा रही है और मांग और उत्पादन के बीच खाई को पाटा नहीं जा सक रहा है। लेकिन पिछले पांच सालों के भीतर जो नीतिगत बदलाव हुए हैं उम्मीद की जानी चाहिये कि अगले दशक के दौरान हवा बदलेगी। फिक्की की राष्ट्रीय रक्षा समिति के सदस्य कमोडोर मुकेश भार्गव ने कहा कि मेक इन इंडिया योजना के तहत सरकार ने रक्षा को प्राथमिकता वाले क्षेत्र के तौर पर पहचान की है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर के सामने एक बड़ी चुनौती है कि निर्यात के दौरान यह देखना होता है कि अपनी सेनाओं को रक्षा साज सामान की सप्लाई करते वक्त उत्पादों की कीमत क्या हो।

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