DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: बेल को मिला वायुसेना के लिए आकाश मिसाइलों का ठेका

आकाश मिसाइल राजपथ पर
फाइल फोटो

नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बेल) को भारतीय वायुसेना के लिये सतह से आसमान में मार करने वाली आकाश मिसाइलों की सप्लाई का ठेका मिला है। आकाश मिसाइलें देश में ही भारत के रक्षा शोध संगठन (DRDO) द्वारा विकसित की गई हैं।





भारतीय वायुसेना को आकाश मिसाइलों के 07 स्क्वाड्रन की सप्लाई के लिये करार पर यहां रक्षा मंत्रालय में दस्तखत किये गए। इन मिसाइलों की कुल लागत 5,357 करोड़ रुपये होगी। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स की एक विज्ञप्ति के मुताबिक  इन मिसाइलों की सप्लाई तीन साल के भीतर हो जाएगी।  जमीन से आसमान में किसी हमलावर विमान को मार गिराने की क्षमता रखने वाली इन मिसाइलों को देश भर में स्थित 07 वायुसैनिक अड्डों पर तैनात किया जाएगा। इससे भारतीय वायुसेना की रक्षात्मक  क्षमता में भारी इजाफा होगा। यह  मिसाइल जिस वायुसैनिक अड्डे पर तैनात होगी वहां दुश्मन के लड़ाकू विमान फटक नहीं सकेंगे।

गौरतलब है कि आकाश मिसाइल जमीन से आसमान में 25 किलोमीटर दूर तक किसी हमलावर मिसाइल को मार गिरा सकती है। यह मिसाइल अचूक निशाने वाली है और इसकी मार से कोई भी हमलावर मिसाइल नहीं बच सकती है।  यह मिसाइल राजेन्द्र फेज्ड ऐरे रेडार से लैस है जो एक साथ कई लक्ष्यों को देख कर उन पर निशाना साध सकती है।

 इसके पहले रक्षा मंत्रालय ने रूस की रोजोबोरोनएक्सपोर्ट एजेंसी के साथ  नौसेना के पी-15 वर्ग के स्टील्थ युद्धपोत के रेडार और मिसाइल प्रणाली के आधुनिकीकऱण के लिये एयर डिफेंस कम्पलेक्स काशमीर और रेटडार फ्रैगाट एमएई हासिल करने का समझौता किया था।

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