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स्पेशल रिपोर्ट: अमेरिका से 12 सी-गार्डियन ड्रोन खरीदने को मिली मंजूरी

सी-गार्डियन ड्रोन

नई दिल्ली। अमेरिका से भारतीय नौसेना के लिये 12 सी-गार्डियन ड्रोन खरीदने की मंजूरी भारत ने दे दी है। पहले ऐसे 22  ड्रोन खरीदने  की योजना थी। रक्षा सूत्रों के मुताबिक बाकी दस़ ड्रोन वायुसेना और थलसेना के लिय खरीदे जाएंगे। 22 ड्रोन पर दो अरब डॉलर की लागत तय की गई थी। लेजर गाइडेड बम से लैस इस टोही विमान पर हवा से हवा में मार करने वाली हेलफायर मिसाइल लगी होती है।





एक रक्षा सूत्र ने बताया कि सीमित वित्तीय संसाधनों की वजह से शुरू में केवल 12 ड्रोन ही खरीदने का निर्णय किया गया। अमेरिका द्वारा इन ड्रोनों की लागत बताए जाने के बाद इस सौदे के बारे में एक औपचारिक समझौता जल्द हो जाएगा। प्रीडेटर बी सी- गार्डियन को भारत को बेचने के लिये  अमेरिकी रक्षा सहयोग  कार्यालय से मंजूरी मिल चुकी है।

गौरतलब है कि जून, 2016 में अमेरिका को भारतीय रक्षा मंत्रालय ने 22 एमक्यू-9 प्रीडेटर बी  गार्डियन मेरीटाइम पेट्रोल  नौसैनिक टोही विमान के लिये अमेरिकी कम्पनी जनरल एटोमिक्स को  लेटर आफ रिक्वेस्ट जारी किया गया था। बाद में रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने दिसम्बर, 2017 में  संसद को एक लिखित जानकारी में बताया था कि अमेरिका के जवाब की प्रतीक्षा की जा रही है।

गौरतलब है कि अमेरिका से उच्चतकनीक वाले सैनिक साज सामान हासिल करने के लिये भारत ने कोमकासा (कम्युनिकेशंस कम्पैटिबिलीटी एंड सिक्युरिटी एग्रीमेंट)  सम्पन्न किया था।

सूत्रों ने बताया कि बाकी दस सी गार्डियन ड्रोन के लिये भारत खरीद की कोशिश में है। ये ड्रोन थलसेना और वायुसेना के लिये गैर समुद्री किस्म के होंगे। प्रीडेटर-बी सी-गार्डियन ड्रोन 240 किलोमीटर की गति से लगातार 27 घंटे तक उड़ते रह सकता है। यह विमान 50 हजार फीट  की उंचाई पर उड़ सकता है। इस पर तीन हजार पाउंड के गोला-बारूद डाले जा सकते हैं।

सी-गार्डियन विमान प्रीडेटर-बी की समुद्री किस्म है। इस पर रेथियान द्वारा निर्मित मल्टी मोड मेरीटाइम रेडार लगा  है। यह ड्रोन लम्बी अवधि तक उड़ते रह कर दुश्मन के इलाके का टोही सर्वेक्षण कर सकता है। इस पर अडवांस्ड मेरीन एवियानिक्स लगे होते हैं।

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