DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: आर्मी बेस वर्कशाप को निजी हाथों में देने से रक्षा हलकों में चिंता

आर्मी वर्कशॉप

नई दिल्ली। सेना के हथियारों की मरम्मत और देखभाल की जिम्मेदारी आर्मी बेस वर्कशाप की होती है लेकिन इन्हें सैन्य सुधारों के लिये गठित शेकातकर समिति के सुझावों के तहत निजी हाथों में देने की कवायद इन दिनों चल रही है क्योंकि रक्षा मंत्रालय का लक्ष्य है कि सेनाओं में गैर लड़ाकू कर्मियों की संख्या में कटौती की जाए।





रक्षा सूत्रों के मुताबिक एक आंतरिक आडिट में यह पाया गया है कि सेना के तोपखानों के गोलाबारूद , टैंकों के गोले और सभी प्रकार के हथियारों और वाहनों  के लिये मरम्म्त के लिये पुर्जे नहीं हैं। भारतीय सेना को इन दिनों हथियारों के कलपुर्जों की कमी का गम्भीर सामना करना पड़ रहा है। पुर्जों के अभाव के कारण शस्त्रों और उपकरणों की मरम्मत, रखरखाव औऱ ओवरहाल नहीं हो पा रहा। सैन्य सूत्रों के मुताबिक इस समस्या के स्वीकार करने के बदले शेकातकर समिति के सुझावों के अनुरूप सभी आर्मी बेस वर्कशाप को बंद कर निजी हाथों में सौंपने की तैयारी चल रही है। जनरल शेकातकर समिति ने इसके लिये गोको ( गर्वन्मेंट ओंड कंट्रैक्टर आपरेटेड ) योजना का सुझाव दिया था। आर्मी बेस वर्कशाप सेना के वाहन, हथियार, हेलिकॉप्टर, नाइट विजन  यंत्र और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मरम्मत, रखरखाव और ओवरहाल करते हैं।

सूत्रों के मुताबिक जनरल शेकातकर समिति ने आठ बेस वर्कशाप बंद करने की सिफारिश की है जिस आधार पर इस साल के अंत तक भारतीय सेना और कोर ऑफ इलेक्ट्रिकल एवं मैकेनिकल इंजीनियर्स (ईएमई) की शान की प्रतीक आर्मी बेस वर्कशाप अपना स्वरूप खो देंगी। इनमें से कुछ स्थायी रूप से बंद हो जाएंगी औऱ कुछ को गोको माडल के आधार पर प्राइवेट ठेकेदारों को  बिनी किसी वित्तीय भागीदारी के सौंप दिया जाएगा। साफ है कि प्राइवेट हाथों में गए इन बेस वर्कशापों के काम करने के  तौर तरीके में भी भारी बदलाव आएगा। रक्षा सूत्रों ने सवाल उठाया  है कि बिना कोई भुगतान किये इन कम्पनियों को करोड़ों रुपये की जमीन, उपकरण या मशीनरी देने का क्या तर्क है।

गौरतलब है कि आर्मी बेस वर्कशाप के पास पूरे देश में सैंकड़ों एकड़ जमीन है। लेकिन नई सिफारिशों के बहाने करोड़ों रुपये की जमीन निजी प्रबंधकों को मुफ्त भेंट में दिया जा रहा है। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ के एक पदाधिकारी के मुताबिक डिपो और आर्मी बेस वर्कशाप को बंद कर निजी हाथों में सौंपने से राष्ट्रीय हितों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

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