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स्पेशल रिपोर्ट: 6 पनडुब्बियों का सौदा तय करने में लगेंगे अभी कुछ और साल

परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत
प्रतीकात्मक

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना के लिये जिन छह पनडुब्बियों के विदेशी सहयोग से स्वदेशी निर्माण का सूचना मांग पत्र रक्षा मंत्रालय ने गत 20 जून को जारी किया था उनके चयन के बारे में अंतिम फैसला लेने में  दो से ढ़ाई साल या इससे भी अधिक वक्त लग सकता है।





गौरतलब है कि भारतीय नौसेना के लिये प्रोजेक्ट 75-आई के तहत 06 नई पनडुब्बियों का आरम्भिक  आग्रह पत्र रक्षा मंत्रालय ने 45 हजार करोड़ रुपये की लागत से  स्वदेशी कम्पनियों और उनके विदेशी साझेदारों के बारे में जानकारी भेजने का आग्रह किया था। यह प्रक्रिया कब पूरी होकर किसी कम्पनी से सौदा सम्पन्न होगा इस बारे में पूछे जाने पर यहां नौसेना के वाइस एडमिरल  ए के सक्सेना ने कहा कि यह  प्रक्रिया काफी जटिल होगी क्योंकि इसमें तकनीक हस्तांतरित करने के बारे में जटिल सौदेबाजी होनी है।

आगामी 26-27 जुलाई को यहां नौसेना के सहयोग से वाणिज्य संगठन फिक्की द्वारा आयोजित किये जाने वाले अंतररराष्ट्रीय सम्मेलन की जानकारी देते हुए नौसेना के युद्धपोत उत्पादन और खरीद विभाग के कंट्रोलर वाइस एडमिरल सक्सेना ने कहा कि इस सौदे में भारत की  प्राइवेट सेक्टर कम्पनियों के साथ सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियों को भी भाग लेने की अनुमति दी गई है।  पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि सौदा तय करने में ही कुछ साल लगेगे तो इसे बना कर नौसना को सौंपने में एक दशक से अधिक का वक्त लग सकता है।

गौरतलब है कि  भारतीय नौसेना के बेड़े में 2030 तक 24 पनडब्बियों के होने का लक्ष्य तय किया गया है लेकिन जिस गति से नई पनडुब्बियों को हासिल  करने की प्रक्रिया चल रही है उसे लेकर नौसैनिक हलकों में शंका जाहिर की जा रही है कि पनडुब्बी बेड़े को वांछित संख्या तक पहुंचाने का अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएगा।  उन्होंने कहा कि पोत निर्माण में विदेशी कम्पनियों को साझेदार के तौर पर आमंत्रित करने के पीछे उद्देश्य था कि देश में ही भविष्य में विदेशी कम्पनी के सहयोग के बिना ही पनडुब्बियों का निर्माण हो सके।

देश में बन रहे विमानवाहक पोत आईएसी-1 यानी विक्रांत के बारे में पूछे जाने पर एडमिरल सक्सेना ने कहा कि  2021 तक इसे नौसेना को समुद्री परीक्षण के लिये सौंप दिया जाएगा।  उन्होंने कहा कि भारत के पास युद्धपोत बनाने की क्षमता है जिसका सदुपयोग  व्यापारिक पोतों के निर्माण में किया जान चाहिये। उन्होंने कहा कि एक जीवंत पोत निर्माण उद्योग से देश का सकल घरेलू उत्पाद बढ़ाने में काफी मदद मिलती है। पोत निर्माण उद्योग समुचित रोजगार भी पैदा कर सकता है।

उन्होंने कहा कि हालांकि भारतीय नौसैनिक गोदियों को नौसेना और कोस्ट गार्ड की वजह से आर्डर बुक भरने में मदद मिलती है लेकिन व्यापारिक पोतों के निर्माण के लिये भारतीय कम्पनियों को प्रतिस्पर्द्धी बनना होगा,  ताकि यह उद्योग दीर्धकाल तक जीवंत रह सके।

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