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स्पेशल रिपोर्ट: बोईंग के लिये 150वां गन बे डोर HAL ने बनाया

HAL

नई दिल्ली। अमेरिकी बोईंग कम्पनी द्वारा बनाए गए एफ-ए- 18 सुपर होरनेट लड़ाकू विमान के लिये हिंदुस्तान एरोनाटिक्स लि. (HAL) ने 150 वां गन बे डोर बना कर सौंपा है। किसी लड़ाकू विमान में गन बे डोर वह हिस्सा होता है जो बम रखने के कक्ष के दरवाजे की तरह होते हैं।





हिंदुस्तान एरोनाटिक्स ने यह गन बे डोर अपने बेंगलूर कारखाना में बनाया है। बोईंग सुपर होरनेट विमान दो इंजनों वाला होता है जो सभी मौसम में आवाज से अधिक गति से उड़ सकता है। यह विमान किसी विमानवाहक पोत से भी उड़ाया जा सकता है। बोईंग के मुताबिक यह अगली पीढ़ी का बहुद्देश्यीय लड़ाकू विमान है।

HAL गत 25 सालों से बोईंग को विमानों के कलपुर्जों की सप्लाई करता रहा है। बोईंग ने वर्ष 2007 में हैल को सुपर होरनेट का गन बे डोर बनाने का ठेका दिया था। बोईगं इंडिया प्रेजिडेंट सलिल गुप्ता ने कहा कि हैल के साथ कई सालों से चली आ रही साझेदारी पर हमें गर्व है। हैल अब बोईंग के वैश्विक सप्लाई का अंतरंग हिस्सा बन चुका है। सुपर होरनेट के लिये गन बे डोर हैल से बनवाने से भारत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता दिखती है। 150वां गन बे डोर भारत में बनने से हमने एक मील का पत्थर हासिल किया है।

सलिल गुप्ता ने कहा कि भारत में हमारा निवेश ठोस औऱ दीर्घकालीन है। HAL के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक आर माधवन ने कहा कि भारत में अंतरिक्ष वैमानिकी को मजबूत बनाने के लिये हैल प्रतिबद्ध है। मेक इन इंडिया के तहत भारत में बोईंग की प्रतिबद्धता के लिये हम उन्हें धन्यवाद देते हैं।

भारत में बोईंग ने एफ-ए-18-सुपर होरनेट के जरिये 21वीं सदी का अंतरिक्ष वैमानिकी उद्योग बनाने के लिये प्रतिबद्धता दिखाई है। बोईंग ने कहा है कि यह निर्माण वह महिन्द्रा डिफेंस सिस्टम के जरिये करने को तैयार है। इसकी बदौलत भारत में हजारों नौकरियां बन सकती हैं। इससे सैंकड़ों सप्लायरों को भी मौका मिलेगा। बोईंग के भारत में अब 160 औद्योगिक साझेदार है जिनसे वह एक अरब डॉलर से भी अधिक के सप्लाई करवा रहा है। बोईंग ने कहा कि ये भारतीय साझेदार हैं जो श्रेष्ठ क्वालिटी के उत्पाद बोईंग को सप्लाई कर रहे हैं।

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