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OROP : 3200 मामले न्यायिक समिति के पास भेजे गए

वन रैंक, वन पेंशन

नई दिल्ली। एक रैंक एक पेंशन (OROP) से जुड़ी विसंगतियों के कुल 3,200 मामले सरकार तक पहुंचे हैं जिन्हें परीक्षण के बाद वन रैंक वन पेंशन पर बनाई गई न्यायिक समिति के पास भेजा गया। समिति ने 26 अक्टूबर, 2016 को अपनी रिपोर्ट दी।





ये खुलासा रक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष भामरे ने आज लोकसभा में सांसद मुल्लापल्ली रामचंद्रन के सवाल के लिखित जवाब में किया। उन्होंने बताया कि वन रैंक वन पेंशन के तहत लाभ न मिलने या पेंशन राशि न मिलने से संबंधित जो शिकायतें मिल रही हैं, इन्हें संबंधित कार्यालयों, जैसे कि रक्षा महालेखाकार (CGDA), रक्षा लेखा महानियंत्रक (पेंशन) और पेंशन वितरित करने वाली एजेंसियों (बैंक) के पास इस तरीके से भेजा जा रहा है ताकि इनका समय सीमा के भीतर निवारण हो सके।

डॉ. भामरे ने बताया कि ओआरओपी के खाते के लिए अनुमानित 7488.70 करोड़ रुपये का अनुदान रखा गया है जबकि एक जुलाई 2014 में 31 दिसंबर 2015 तक के बकाये राशि के भुगतान के लिए ये राशि 10,925.11 करोड़ रुपये है। उन्होंने बताया कि 19,93,815 मामलों में पहली किस्त का और LUMPSUM भुगतान किया जा चुका है। इसके तहत 4076.95 करोड़ रुपये वितरित किए गए। पेंशन की दूसरी किस्त 15,57,950 मामलों में दी गई जिसके तहत 2298.21 करोड़ की राशि दी गई।

ओआरओपी से संबंधित सरकार के आदेश के मुताबिक, पेंशन का पुनर्निर्धारण प्रत्येक पांच साल बाद होना है। जिन सैन्य कर्मियों ने आर्मी रूल 1954 के नियम 13(3) 1(i) (b), 13(3) 1(iv) या नियम 16 B के तहत स्वेच्छा से नौकरी छोड़ी है, उन्हें ओआरओपी का लाभ नहीं मिलेगा।

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