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माओवादियों के खिलाफ अब सिर्फ-आक्रमण, आक्रमण और आक्रमण : राजनाथ सिंह

रायपुर: बीते दिनों छत्तीसगढ़ के सुकमा में सीआरपीएफ जवानों पर माओवादी हमले के बाद सरकार ने माओवादियों को खत्म करने के लिए आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है। माओवाद के खात्मे के लिए दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई उच्च स्तरीय बैठक में तय किया गया कि नक्सलियों के खिलाफ अब सिर्फ-आक्रमण, आक्रमण और आक्रमण की नीति के तहत ही काम किया जाएगा।





केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि माओवादियों का खात्मा ही शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने दो-टूक कहा कि माओवादियों के खिलाफ लड़ाई में अब शब्दबाण नहीं चलाएंगे, बल्कि ईंट का जवाब पत्थर से और गोली का जवाब गोलियों से दिया जाएगा।

बैठक में केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरेण रिजिजू, एनएसए अजीत डोभाल समेत कई लोगों ने हिस्सा लिया।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सुकमा के बुर्कापाल में हुए नक्सल हमले में 25 जवानों की शहादत के बाद माओवाद प्रभावित दस राज्यों की उच्चस्तरीय बैठक में इस बात पर भी चिंता जाहिर की कि माओवादियों के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई में अब तक एक भी बड़ी कामयाबी सुरक्षा बलों के हिस्से नहीं आई है। माओवादियों के बड़े लीडर को पकड़ने का एक भी घटनाक्रम याद नहीं है। उन्होंने अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस के बीच बेहतर समन्वय बनाए जाने पर जोर दिया है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि माओवादियों के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई में सुरक्षा बलों को डिफेंसिव तरीके से लड़ने की आदत छोड़नी होगी। माओवादी के खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाना होगा। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह समेत दस राज्यों के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी, अर्ध सैनिक बलों के आला अधिकारी शामिल हुए।

20 वर्ष में 12 हजार की जान गई की जान गई

बीते विगत 20 वर्षों में देश के 12 हजार लोगों की जान माओवादी हिंसा में गई है। इन 12 हजार लोगों को 27 सौ सुरक्षा बलों के जवान हैं, जबकि 9 हजार 300 निर्दोष, निरीह और मासूम जनता है। बीते 4 महीने में 49 जवानों की शहादत हुई है, इसमें से सर्वाधिक सीआरपीएफ के जवान हैं।

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