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क्या कश्मीर में PAVA बम बनेगा पत्थरबाजों-दंगाइयों का इलाज?

PAVA बम

नई दिल्ली। कश्मीर में पत्थरबाजों से निबटने के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल पर मचे बवाल के बाद इसके विकल्प के तौर पर PAVA (Pelargonic Acid Vanillyl Amide, इसे Nonivamide भी कहा जाता है) बम के बारे में सोचा जा सकता है। इसमें इस्तेमाल किया जाने वाला रसायन शिमला मिर्च से बनाया जाता है।





PAVA बम में ओलोएओरेसिन नाम का गाढा पदार्थ होता है जिसे मसालेदार चिपचिपे पदार्थ में मिलाकर बम के खोल में भरा जाता है। ये बम अलग-अलग आकार के होते हैं जिन्हें हथगोले की तरह फेंका जा सकता है और अश्रुगैस या गोली चलाने जैसे बंदूकों के जरिए भी दागा जा सकता है। PAVA बम तेज आवाज के साथ फटता है और इससे गैस निकलने लगती है। गैस के प्रभाव से पदार्थ उन लोगों के बदन पर चिपक जाता है जिन्हें काबू करने के लिए बम दागा जाता है। बम की चपेट में आये दंगाई की आँखों में जलन होने लगती है और पानी बहता है जिससे कि वे ठीक से देख न पाएं। अगर इसके असर से बचने के लिए पानी इस्तेमाल किया जाए तो त्वचा जलने लगती है और इसका असर बढ़ जाता है। इसके असर को जल्द कम करना भी मुमकिन नहीं है।

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ख़ास बात ये भी है कि बम का खोल प्लास्टिक का होता है और दागे जाने के बाद इतनी जबरदस्त गरमी पैदा होती है कि ये पिघल जाता है इसलिए दंगाई चाहकर भी इसे उठाकर वापस नहीं फेंक सकता। प्लास्टिक का होने की वजह से वह चिपक जाता है। जबकि आंसू गैस के गोले कई बार दंगाई उठाकर सुरक्षा बल पर ही फेंक देते हैं।

PAVA बम की गैस के असर से सांस लेना भी दूभर हो जाता है। इसकी मारक क्षमता पैलेट गन से ज्यादा होती है इसलिए इससे दूर तक दंगाइयों से निबटा जा सकता है। वैसे, सुरक्षा बलों को इसके इस्तेमाल का यह भी फ़ायदा होगा कि उन्हें दंगाइयों को पहचानने में भी आसानी हो जाएगी। गौरतलब है कि पैलेट गन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होनी है।

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