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46 साल बाद शहीद जवानों के परिजन सम्मानित

1971 का युद्ध

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 1971 के युद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों के परिवार वालों को सम्मानित किया। मोदी और हसीना ने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में शहीद हुए 2 हजार भारतीय जवानों के परिवार वालों को दिल्ली स्थित मानेकशॉ (1971 युद्ध के हीरो सैम मानेकशॉ के नाम पर) सेंटर में सम्मानित किया। सम्मान के तौर पर शहीदों के परिवारवालों को 5 लाख रुपये मिलेंगे। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने मुक्ति योद्धाओं के परिवार कल्याण के लिए 3 घोषणाएं कीं।





1971 का युद्ध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 1971 के युद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों के परिवार वालों को सम्मानित किया।

शेख हसीना ने लांसनायक अल्बर्ट एक्का (परमवीर चक्र), मेजर अनूप सिंह गहलोत (महावीर चक्र), सूबेदार मल्कियत सिंह (महावीर चक्र) और सिपाही अनुसूया प्रसाद (महावीर चक्र), लेफ्टीनेंट समीर दास, स्क्वाड्रन लीडर ए. बी. सामंता और लांस नायक मोहिनी रंजन चक्रबर्ती के परिजनों को सम्मानित किया।

इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘मुक्ति योद्धाओं के साथ-साथ बांग्लादेश के संघर्ष को भी कोई नहीं भुला सकता। मुक्तियोद्धाओं के साथ साथ बांग्लादेश के लिए किए गए भारतीय फौज के संघर्ष और बलिदान को भी कोई नहीं भुला सकता। ऐसा करने में उनकी एकमात्र प्रेरणा थी, बांग्लादेश की जनता के प्रति उनका प्रेम और वहां के लोगों के सपनों के प्रति उनका सम्मान।‘

मुक्ति योद्धाओं के परिवार कल्याण के लिए 3 घोषणाएं

प्रधानमंत्री ने मुक्ति योद्धाओं के परिवार कल्याण के लिए 3 घोषणाएं कीं जिसमें अगले 5 वर्षों में मुक्तियोद्धा स्कॉलरशिप स्कीम दस हजार बच्चों तक पहुंचाने की बात कही गई है। उन्होंने कहा मेरा यह स्पष्ट मत है कि मेरे देश के साथ ही भारत का हर पड़ोसी देश प्रगति के मार्ग पर अग्रसर हो। 1971 में भारत की दिखाई ये इंसानियत पिछली शताब्दी की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है। स्वार्थी न बनकर हमने पूरे क्षेत्र का भला चाहा है। लेकिन दुःख की बात है कि इन दो विचारधाराओं के विपरीत भी दक्षिण एशिया में एक मानसिकता है, ऐसी सोच है जिसका वैल्यू सिस्टम मानवता पर नहीं, बल्कि हिंसा, अतिवाद तथा आतंक पर है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जो मैं भारत के लिए सोचता हूं, वही कामना बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी देश के लिए भी करता हूं। भारत सदैव एक प्रबल तथा विश्वसनीय मित्र की तरह हर घड़ी बांग्लादेश की हर सहायता के लिए तैयार है और रहेगा। हम दुःख-सुख के साथी हैं। भारत-बांग्लादेश संबंध ना सरकारों के मोहताज हैं और ना ही सत्ता के। भारत और बांग्लादेश इसलिए साथ हैं, क्योंकि दोनों देशों के 140 करोड़ लोग साथ हैं।‘

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